आयुर्वेद पर बढ़ा मरीजों का भरोसा: छह महीने में 8.75 लाख लोग पहुंचे आयुष अस्पताल, लेकिन 250 से ज्यादा डॉक्टरों के पद खाली
प्रदेश में आयुर्वेद और आयुष चिकित्सा पद्धति पर लोगों का भरोसा लगातार बढ़ रहा है। इसका अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि पिछले छह महीने में 8.75 लाख से ज्यादा मरीज आयुष अस्पतालों और स्वास्थ्य केंद्रों में इलाज के लिए पहुंचे। लेकिन दूसरी ओर, आयुष संस्थानों में डॉक्टरों और विशेषज्ञों की भारी कमी बनी हुई है। प्रदेश में 250 से ज्यादा पद खाली होने से मरीजों को बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं देने में परेशानी आ रही है।
स्वास्थ्य विभाग के आंकड़ों के अनुसार, आयुष चिकित्सा को लेकर लोगों की रुचि बढ़ी है। ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में बड़ी संख्या में लोग आयुर्वेद, होम्योपैथी और अन्य पारंपरिक चिकित्सा पद्धतियों का सहारा ले रहे हैं। इसके बावजूद कई अस्पतालों और केंद्रों में पर्याप्त चिकित्सक उपलब्ध नहीं हैं।
मरीज बढ़े, लेकिन डॉक्टरों की कमी बनी चुनौती
आयुष अस्पतालों में मरीजों की संख्या बढ़ने के बावजूद विशेषज्ञ डॉक्टरों की कमी स्वास्थ्य व्यवस्था के लिए बड़ी चुनौती बन गई है। कई स्थानों पर स्वीकृत पद लंबे समय से खाली पड़े हैं। इसका सीधा असर मरीजों को मिलने वाली सुविधाओं पर पड़ रहा है।
अधिकारियों के अनुसार, डॉक्टरों की कमी के कारण कई आयुष केंद्रों में नियमित ओपीडी संचालन और विशेषज्ञ सेवाएं प्रभावित होती हैं। मरीजों को इलाज के लिए लंबा इंतजार करना पड़ता है या फिर दूसरे केंद्रों का रुख करना पड़ता है।
ग्रामीण क्षेत्रों में ज्यादा असर
आयुष चिकित्सा का सबसे बड़ा नेटवर्क ग्रामीण क्षेत्रों में है, जहां लोग कम खर्च में इलाज की उम्मीद लेकर इन केंद्रों तक पहुंचते हैं। लेकिन डॉक्टरों की कमी के कारण ग्रामीण इलाकों में स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता प्रभावित हो रही है।
विशेषज्ञों का कहना है कि आयुष चिकित्सा को बढ़ावा देने के साथ-साथ मानव संसाधन को मजबूत करना भी जरूरी है। अस्पतालों में पर्याप्त डॉक्टर, स्टाफ और जरूरी सुविधाएं उपलब्ध होने से मरीजों को इसका अधिक लाभ मिल सकेगा।
खाली पद भरने की जरूरत
स्वास्थ्य क्षेत्र से जुड़े जानकारों का मानना है कि आयुष अस्पतालों में बढ़ती मरीज संख्या को देखते हुए जल्द से जल्द खाली पदों को भरना जरूरी है। इससे न केवल मरीजों को बेहतर उपचार मिलेगा, बल्कि आयुष चिकित्सा व्यवस्था को भी मजबूती मिलेगी।
सरकार की ओर से आयुष सेवाओं के विस्तार पर जोर दिया जा रहा है, लेकिन डॉक्टरों की कमी दूर करना सबसे बड़ी प्राथमिकता बनी हुई है। अब देखना होगा कि खाली पदों को भरने के लिए विभाग कब तक प्रभावी कदम उठाता है।
मरीजों की बढ़ती संख्या यह बताती है कि आयुर्वेद और आयुष पद्धतियों को लेकर लोगों का विश्वास बढ़ रहा है, लेकिन इस भरोसे को मजबूत बनाए रखने के लिए पर्याप्त डॉक्टर और संसाधन उपलब्ध कराना जरूरी होगा।