उज्जैन में महाकाल मंदिर के सामने परचुरे भवन ध्वस्त, हाईकोर्ट के आदेश पर देर रात चला बुलडोजर
उज्जैन में विश्व प्रसिद्ध श्री महाकालेश्वर मंदिर के सामने स्थित पुराने और जर्जर परचुरे भवन को बुधवार देर रात ध्वस्त कर दिया गया। करीब 60 से 65 साल पुराने इस भवन पर नगर निगम ने हाईकोर्ट के आदेश के पालन में कार्रवाई की। महाकाल मंदिर की शयन आरती के बाद रात करीब 11 बजे बुलडोजर चलाकर भवन को जमींदोज कर दिया गया।
कार्रवाई के दौरान प्रशासन और नगर निगम की टीम मौके पर मौजूद रही। सुरक्षा व्यवस्था को देखते हुए आसपास के क्षेत्र में पर्याप्त इंतजाम किए गए थे। भवन को हटाने की प्रक्रिया लंबे समय से चल रही थी, जिसके बाद न्यायालय के आदेश के तहत यह कार्रवाई की गई।
जर्जर हालत में था भवन
परचुरे भवन काफी पुराना हो चुका था और इसकी स्थिति जर्जर बताई जा रही थी। महाकाल मंदिर के सामने स्थित होने के कारण सुरक्षा और श्रद्धालुओं की सुविधा को ध्यान में रखते हुए भवन को हटाने का निर्णय लिया गया।
मंदिर क्षेत्र में लगातार बढ़ रही श्रद्धालुओं की संख्या को देखते हुए आसपास की व्यवस्थाओं को बेहतर बनाने पर जोर दिया जा रहा है। इसी क्रम में पुराने और असुरक्षित निर्माणों को हटाने की प्रक्रिया भी की जा रही है।
हाईकोर्ट के आदेश के बाद कार्रवाई
परचुरे भवन को हटाने की कार्रवाई उच्च न्यायालय के आदेश के पालन में की गई। न्यायालय के निर्देशों के बाद नगर निगम और प्रशासन ने इसकी तैयारी शुरू की थी।
बुधवार रात महाकाल मंदिर की शयन आरती पूरी होने के बाद कार्रवाई शुरू की गई, ताकि श्रद्धालुओं की आवाजाही और धार्मिक गतिविधियों में किसी तरह की परेशानी न हो। नगर निगम की टीम ने मशीनों की मदद से भवन को गिराने का काम पूरा किया।
मंदिर क्षेत्र के विकास पर जोर
महाकाल मंदिर क्षेत्र में पिछले कुछ वर्षों में लगातार विकास कार्य किए जा रहे हैं। श्रद्धालुओं की सुविधा, सुरक्षा और बेहतर प्रबंधन के लिए आसपास के क्षेत्रों में बदलाव किए जा रहे हैं।
पुराने और जर्जर भवनों को हटाने के पीछे भी यही उद्देश्य बताया जा रहा है कि मंदिर क्षेत्र को अधिक सुरक्षित और व्यवस्थित बनाया जा सके। प्रशासन की ओर से आगे भी ऐसे भवनों की समीक्षा की जा सकती है।
कार्रवाई के दौरान रही सुरक्षा व्यवस्था
भवन ध्वस्तीकरण के दौरान किसी तरह की अप्रिय स्थिति न बने, इसके लिए नगर निगम और पुलिस प्रशासन की टीम तैनात रही। क्षेत्र में आवाजाही को नियंत्रित किया गया और पूरी प्रक्रिया को सावधानीपूर्वक पूरा किया गया।
लगभग छह दशक पुराने परचुरे भवन के हटने के बाद अब मंदिर के सामने का क्षेत्र अधिक खुला और व्यवस्थित दिखाई देगा। प्रशासन का कहना है कि न्यायालय के निर्देशों के अनुसार ही कार्रवाई की गई है और आगे भी मंदिर क्षेत्र में सुरक्षा और सुविधाओं को प्राथमिकता दी जाएगी।