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डेढ़ लाख शिक्षकों को राहत की उम्मीद, TET से छूट की मांग पर हाई कोर्ट का बड़ा निर्देश; 60 दिन में फैसला करने को कहा

 

देश में करीब डेढ़ लाख शिक्षकों से जुड़े टीईटी (TET) मामले में हाई कोर्ट ने महत्वपूर्ण निर्देश दिया है। अदालत ने संबंधित अधिकारियों को टीचर एलिजिबिलिटी टेस्ट (TET) से छूट देने की मांग पर 60 दिनों के भीतर फैसला करने को कहा है। इस निर्देश के बाद लंबे समय से राहत की उम्मीद लगाए बैठे शिक्षकों के मामले में आगे की कार्रवाई का रास्ता साफ होने की संभावना है।

यह मामला उन शिक्षकों से जुड़ा है, जो टीईटी की अनिवार्यता से छूट की मांग कर रहे हैं। शिक्षकों का पक्ष है कि उनकी नियुक्ति और सेवा से जुड़े पहलुओं को ध्यान में रखते हुए इस मांग पर विचार किया जाना चाहिए। हाई कोर्ट के निर्देश के बाद अब संबंधित प्राधिकरण को तय समयसीमा में इस मांग पर निर्णय लेना होगा।

क्या है पूरा मामला?

टीईटी यानी शिक्षक पात्रता परीक्षा शिक्षकों की नियुक्ति के लिए निर्धारित पात्रता मानकों में से एक है। शिक्षा के अधिकार कानून और संबंधित नियमों के तहत निर्धारित कक्षाओं में शिक्षक बनने के लिए टीईटी की पात्रता महत्वपूर्ण मानी जाती है। हालांकि, अलग-अलग समय पर नियुक्त शिक्षकों और लागू नियमों को लेकर कानूनी विवाद सामने आते रहे हैं।

डेढ़ लाख शिक्षकों से जुड़ा यह मामला भी टीईटी से छूट की मांग को लेकर है। संबंधित शिक्षकों की ओर से इस विषय पर राहत मांगी गई है। अब हाई कोर्ट ने सीधे छूट देने के बजाय संबंधित प्राधिकरण को मांग पर निर्धारित समय में फैसला करने का निर्देश दिया है।

60 दिनों में लेना होगा निर्णय

हाई कोर्ट के निर्देश के अनुसार, टीईटी से छूट की मांग पर 60 दिनों के भीतर फैसला किया जाना है। इसका मतलब है कि संबंधित अधिकारियों को मामले के तथ्यों, लागू नियमों और शिक्षकों की ओर से रखे गए पक्ष पर विचार करके निर्णय लेना होगा।

हालांकि, अदालत की ओर से तय समयसीमा में फैसला करने का निर्देश मिलना अपने आप में टीईटी से छूट मिलने के बराबर नहीं है। अंतिम राहत इस बात पर निर्भर करेगी कि संबंधित प्राधिकरण क्या निर्णय लेता है और उसमें किन नियमों को आधार बनाया जाता है।

शिक्षकों की नजरें फैसले पर

इस मामले में अब संबंधित शिक्षकों की नजरें आगामी निर्णय पर रहेंगी। यदि मांग स्वीकार की जाती है, तो उसका प्रभाव संबंधित शिक्षकों की पात्रता और सेवा संबंधी स्थिति पर पड़ सकता है। वहीं, मांग खारिज होने की स्थिति में आगे कानूनी विकल्पों पर विचार किया जा सकता है।

फिलहाल उपलब्ध जानकारी में हाई कोर्ट का नाम, याचिकाकर्ताओं का विवरण और संबंधित आदेश की तारीख स्पष्ट नहीं है। इसलिए शिक्षकों को अंतिम स्थिति समझने के लिए अदालत के आधिकारिक आदेश और संबंधित विभाग के फैसले का इंतजार करना होगा।