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दुर्गा नवमी पर सागर के चकराघाट में हुआ रावण दहन, बाण लगते ही 5 मिनट में जल गया 51 फीट ऊंचा पुतला; 22 साल से हो रहा आयोजन

 

मध्य प्रदेश के सागर में दुर्गा नवमी के अवसर पर चकराघाट पर रावण दहन का आयोजन किया गया। यहां 51 फीट ऊंचे रावण के पुतले का दहन देखने के लिए बड़ी संख्या में लोग जुटे। जैसे ही रावण के पुतले पर बाण लगाया गया, उसमें आग लग गई और करीब पांच मिनट में पूरा पुतला जलकर राख हो गया। इस आयोजन को देखने के लिए श्रद्धालुओं और स्थानीय लोगों में उत्साह नजर आया।

चकराघाट पर रावण दहन का यह कार्यक्रम पिछले 22 वर्षों से आयोजित किया जा रहा है। हर साल की तरह इस बार भी आयोजन को लेकर लोगों में खास उत्सुकता रही। रावण दहन के दौरान लोगों ने बुराई पर अच्छाई की जीत का संदेश याद किया।

बाण लगते ही धू-धू कर जला रावण

कार्यक्रम के दौरान 51 फीट ऊंचे रावण के पुतले को मैदान में खड़ा किया गया था। जैसे ही पुतले पर बाण लगाया गया, आग तेजी से फैलने लगी। देखते ही देखते रावण का पुतला धू-धू कर जलने लगा। करीब पांच मिनट में पुतला पूरी तरह जल गया।

रावण दहन के इस दृश्य को देखने के लिए मौके पर लोगों की भीड़ मौजूद रही। पुतले में आग लगते ही लोगों ने उत्साह के साथ कार्यक्रम देखा। आयोजन के दौरान धार्मिक माहौल बना रहा।

22 वर्षों से जारी है परंपरा

सागर के चकराघाट पर रावण दहन का आयोजन पिछले 22 साल से किया जा रहा है। लंबे समय से आयोजित हो रहा यह कार्यक्रम स्थानीय लोगों के लिए धार्मिक और सांस्कृतिक महत्व रखता है। हर साल इस आयोजन के जरिए बुराई पर अच्छाई की जीत का संदेश दिया जाता है।

दुर्गा नवमी के अवसर पर हुए इस कार्यक्रम में रावण दहन को देखने के लिए लोगों की भागीदारी रही। आयोजन से जुड़ी परंपरा समय के साथ स्थानीय स्तर पर अपनी पहचान बना चुकी है।

बुराई पर अच्छाई की जीत का संदेश

रावण दहन को भारतीय परंपरा में अहंकार, अन्याय और बुराई के अंत के प्रतीक के रूप में देखा जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, भगवान श्रीराम ने रावण का वध कर धर्म और सत्य की स्थापना की थी। इसी प्रसंग की याद में देश के अलग-अलग हिस्सों में रावण दहन किया जाता है।

सागर के चकराघाट पर भी 51 फीट ऊंचे रावण के पुतले का दहन इसी संदेश के साथ किया गया। बाण लगने के बाद पांच मिनट में पुतले का जलना कार्यक्रम का मुख्य आकर्षण रहा। 22 वर्षों से चली आ रही यह परंपरा इस बार भी लोगों के लिए आकर्षण का केंद्र बनी।