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सर्दियों में बाहर ही नहीं, घर के अंदर का प्रदूषण भी बढ़ा सकता है सांस की परेशानी, स्वास्थ्य विभाग ने जारी की एडवाइजरी

 

सर्दियों का मौसम शुरू होते ही वायु प्रदूषण और सांस से जुड़ी बीमारियों का खतरा बढ़ने लगता है। आमतौर पर लोग प्रदूषण के लिए बाहर की जहरीली हवा, धूल और धुएं को जिम्मेदार मानते हैं, लेकिन घर के अंदर मौजूद प्रदूषण भी स्वास्थ्य के लिए उतना ही खतरनाक हो सकता है। खासकर सर्दियों में जब लोग ठंड से बचने के लिए घरों के दरवाजे और खिड़कियां बंद रखते हैं, तब घर के भीतर प्रदूषित हवा जमा होने लगती है। इससे अस्थमा, एलर्जी, खांसी और सांस लेने में परेशानी जैसी समस्याएं बढ़ सकती हैं। इसे देखते हुए स्वास्थ्य विभाग ने लोगों के लिए एडवाइजरी जारी कर सावधानी बरतने की सलाह दी है।

घर के अंदर इन चीजों से फैलता है प्रदूषण

स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार, घर के भीतर कई ऐसी चीजें होती हैं जो हवा की गुणवत्ता को प्रभावित करती हैं। रसोई में खाना बनाते समय निकलने वाला धुआं, लकड़ी और कोयले का इस्तेमाल, अगरबत्ती, धूपबत्ती, मच्छर भगाने वाली कॉइल और सिगरेट का धुआं घर के अंदर वायु प्रदूषण बढ़ा सकते हैं। इसके अलावा सफाई के दौरान उड़ने वाली धूल, पेंट, केमिकल युक्त क्लीनर और फर्नीचर से निकलने वाले कुछ रासायनिक तत्व भी हवा को दूषित कर सकते हैं।

सर्दियों में कम वेंटिलेशन के कारण ये प्रदूषक घर के अंदर लंबे समय तक बने रहते हैं। इससे बच्चों, बुजुर्गों और पहले से सांस की बीमारी से पीड़ित लोगों को ज्यादा परेशानी हो सकती है।

अस्थमा और एलर्जी के मरीज रहें सावधान

घर के अंदर प्रदूषण का सबसे ज्यादा असर उन लोगों पर पड़ सकता है जिन्हें अस्थमा, ब्रोंकाइटिस या सांस संबंधी दूसरी बीमारियां हैं। प्रदूषित हवा में मौजूद बारीक कण सांस के जरिए फेफड़ों तक पहुंच सकते हैं। इससे खांसी, गले में जलन, सीने में जकड़न और सांस फूलने जैसी समस्याएं हो सकती हैं।

विशेषज्ञों के मुताबिक, लंबे समय तक प्रदूषित हवा के संपर्क में रहने से सांस संबंधी समस्याएं गंभीर रूप ले सकती हैं। बच्चों के फेफड़े विकसित हो रहे होते हैं, इसलिए उन्हें भी घर के अंदर की खराब हवा से बचाना जरूरी है।

प्रदूषण से बचने के लिए इन बातों का रखें ध्यान

स्वास्थ्य विभाग की एडवाइजरी के अनुसार, घर के अंदर हवा की गुणवत्ता बेहतर बनाए रखने के लिए कुछ जरूरी सावधानियां बरतनी चाहिए।

  • घर में पर्याप्त वेंटिलेशन रखें और मौसम अनुकूल होने पर खिड़कियां खोलें।

  • खाना बनाते समय रसोई में एग्जॉस्ट फैन या चिमनी का इस्तेमाल करें।

  • घर के अंदर सिगरेट और बीड़ी बिल्कुल न पिएं।

  • मच्छर भगाने वाली कॉइल और धुआं पैदा करने वाले उत्पादों का कम इस्तेमाल करें।

  • घर की नियमित सफाई करें, ताकि धूल जमा न हो।

  • तेज गंध वाले केमिकल और क्लीनिंग प्रोडक्ट का इस्तेमाल सावधानी से करें।

  • घर में नमी और फफूंद जमा न होने दें।

बच्चों और बुजुर्गों का रखें विशेष ध्यान

सर्दियों में बच्चों, बुजुर्गों और गर्भवती महिलाओं को प्रदूषण से बचाना विशेष रूप से जरूरी है। यदि किसी व्यक्ति को लगातार खांसी, सांस लेने में परेशानी, सीने में दर्द या घरघराहट की समस्या हो रही है तो इसे सामान्य सर्दी-जुकाम समझकर नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। ऐसी स्थिति में डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए।

स्वास्थ्य विभाग ने लोगों को सलाह दी है कि वे केवल बाहर की हवा की गुणवत्ता पर ही ध्यान न दें, बल्कि अपने घर के वातावरण को भी स्वच्छ और सुरक्षित रखें। सर्दियों में स्वस्थ रहने के लिए साफ हवा, उचित वेंटिलेशन और धुएं से दूरी बनाए रखना बेहद जरूरी है।