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जबलपुर के कछपुरा मालगोदाम में प्रदूषण पर NGT सख्त, सरकार और प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड से मांगा जवाब; 50 हजार लोगों के प्रभावित होने का दावा

 

मध्य प्रदेश के जबलपुर स्थित कछपुरा रेलवे मालगोदाम में खाद्यान्न के साथ सीमेंट, कोयला, खाद और आयरन ओर की लोडिंग-अनलोडिंग से होने वाले प्रदूषण के मामले में नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (NGT) ने सख्त रुख अपनाया है। ट्रिब्यूनल ने पहले दिए गए आदेशों का पालन नहीं होने पर राज्य सरकार और मध्य प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है।

यह मामला मालगोदाम से उड़ने वाली धूल और आसपास रहने वाले लोगों को होने वाली परेशानी से जुड़ा है। याचिकाकर्ताओं का आरोप है कि मालगोदाम में प्रदूषण रोकने के पर्याप्त इंतजाम नहीं किए गए हैं। इसके कारण आसपास की बस्तियों में रहने वाले करीब 50 हजार लोगों को परेशानी हो रही है।

पहले भी NGT दे चुका है निर्देश

कछपुरा रेलवे मालगोदाम के प्रदूषण को लेकर नागरिक उपभोक्ता मार्गदर्शक मंच के डॉ. पीजी नाजपांडे और रजत भार्गव ने NGT में याचिका दायर की थी। इस मामले में 7 अप्रैल 2025 को ट्रिब्यूनल ने आदेश जारी किए थे।

याचिका में कहा गया था कि मालगोदाम घनी आबादी के पास स्थित है। इसके आसपास आवासीय कॉलोनियां, स्कूल और ऐतिहासिक गुलौआ तालाब भी हैं। मास्टर प्लान में निर्धारित ग्रीन बेल्ट क्षेत्र भी इसके नजदीक है। ऐसे में माल की लोडिंग-अनलोडिंग के दौरान उड़ने वाली धूल लोगों के स्वास्थ्य और पर्यावरण के लिए खतरा बन रही है।

एक साल बाद भी कार्रवाई नहीं होने का आरोप

याचिकाकर्ताओं की ओर से अधिवक्ताओं ने NGT में पक्ष रखते हुए कहा कि अप्रैल 2025 के आदेश के बाद भी प्रदूषण नियंत्रण के प्रभावी उपाय नहीं किए गए। रेलवे मालगोदाम में धूल रोकने के लिए जरूरी व्यवस्थाएं नहीं होने और केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के दिशा-निर्देशों का पालन नहीं किए जाने का आरोप लगाया गया।

मामले में यह भी कहा गया कि मालगोदाम को संचालन के लिए 5 अप्रैल 2023 को प्रदूषण नियंत्रण संबंधी अनुमति दी गई थी। इसमें प्रदूषण रोकने की शर्तें रखी गई थीं, लेकिन उनके पालन को लेकर प्रभावी कार्रवाई नहीं हुई। इसी आधार पर अवमानना याचिका दायर की गई।

11 अगस्त को होनी है अगली सुनवाई

19 मई 2026 को प्रकाशित रिपोर्ट के अनुसार, अवमानना मामले में NGT ने राज्य शासन और प्रदूषण नियंत्रण मंडल को नोटिस जारी कर जवाब मांगा था। मामले की अगली सुनवाई 11 अगस्त निर्धारित की गई थी। इस सुनवाई में यह स्पष्ट होना था कि पहले दिए गए आदेशों का पालन कराने के लिए संबंधित विभागों ने क्या कदम उठाए।

धूल रोकने के लिए क्या इंतजाम जरूरी?

रेलवे मालगोदामों में सीमेंट, कोयला और अन्य धूल पैदा करने वाली सामग्री की लोडिंग-अनलोडिंग के दौरान प्रदूषण कम करने के लिए कई उपाय सुझाए गए हैं। इनमें नियमित पानी का छिड़काव, एंटी-स्मॉग गन, ढके हुए ट्रकों में माल का परिवहन, पक्की सड़कें, धूल रोकने वाली दीवारें और हरित पट्टी विकसित करना शामिल है।

इसके अलावा लोडिंग-अनलोडिंग के काम में मशीनी व्यवस्था अपनाने और मजदूरों को सुरक्षा उपकरण उपलब्ध कराने पर भी जोर दिया जाता है। कछपुरा मालगोदाम के मामले में अब नजर इस बात पर रहेगी कि संबंधित विभाग NGT के सामने क्या जवाब देते हैं और प्रदूषण नियंत्रण के लिए क्या कदम उठाए जाते हैं।