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भोपाल के बड़े तालाब पर NGT सख्त, 72 अतिक्रमण हटाने के लिए तीन सप्ताह का अल्टीमेटम

 

राजधानी के ऐतिहासिक बड़े तालाब (भोज वेटलैंड) के संरक्षण को लेकर नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (NGT) ने प्रशासन को कड़ा निर्देश दिया है। एनजीटी ने तालाब के एफटीएल (फुल टैंक लेवल) से 50 मीटर दायरे और बफर जोन में मौजूद 72 अतिक्रमण तीन सप्ताह के भीतर हटाने का अंतिम अल्टीमेटम दिया है।

ट्रिब्यूनल ने स्पष्ट किया है कि यदि तय समय सीमा में कार्रवाई पूरी नहीं की गई तो संबंधित क्षेत्र के एसडीएम और तहसीलदार व्यक्तिगत रूप से जिम्मेदार माने जाएंगे। एनजीटी के इस निर्देश के बाद प्रशासनिक स्तर पर हलचल तेज हो गई है।

तालाब संरक्षण को लेकर सख्त रुख

बड़े तालाब को भोपाल की जीवनरेखा माना जाता है। इसके जलग्रहण क्षेत्र और आसपास के इलाकों में हो रहे अतिक्रमण को लेकर लंबे समय से सवाल उठते रहे हैं। पर्यावरण संरक्षण से जुड़े मामलों में एनजीटी पहले भी तालाब क्षेत्र को अतिक्रमण मुक्त रखने के निर्देश दे चुका है।

72 अतिक्रमणों पर होगी कार्रवाई

प्रशासन द्वारा किए गए सर्वे में तालाब के एफटीएल क्षेत्र और निर्धारित बफर जोन में 72 ऐसे निर्माण चिह्नित किए गए हैं, जिन्हें अवैध माना गया है। अब इन सभी अतिक्रमणों को हटाने के लिए तीन सप्ताह की समय सीमा तय की गई है।

अधिकारियों की तय होगी जवाबदेही

एनजीटी ने अपने आदेश में अधिकारियों की जिम्मेदारी भी तय कर दी है। ट्रिब्यूनल ने कहा है कि यदि आदेश का पालन नहीं हुआ तो संबंधित एसडीएम और तहसीलदार को जवाबदेह माना जाएगा। इससे प्रशासनिक अधिकारियों पर कार्रवाई पूरी करने का दबाव बढ़ गया है।

पर्यावरण संरक्षण के लिए जरूरी कदम

विशेषज्ञों का कहना है कि बड़े तालाब जैसे जलस्रोतों के आसपास अतिक्रमण बढ़ने से जल संरक्षण, जैव विविधता और पर्यावरण पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है। बफर जोन का उद्देश्य तालाब को प्रदूषण और अवैध निर्माण से बचाना है।

प्रशासन ने शुरू की तैयारी

एनजीटी के निर्देश के बाद प्रशासन ने चिन्हित अतिक्रमणों की सूची और कार्रवाई की योजना पर काम शुरू कर दिया है। अधिकारियों का कहना है कि न्यायालय और एनजीटी के निर्देशों का पालन करते हुए नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।

अब देखना होगा कि तय तीन सप्ताह की अवधि में प्रशासन इन 72 अतिक्रमणों को हटाने की कार्रवाई कितनी तेजी से पूरी करता है।