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नर्मदा जल विवाद: मध्य प्रदेश का 7669 करोड़ रुपये का दावा खारिज, अब गुजरात को देने होंगे 550 करोड़

 

नर्मदा जल बंटवारे से जुड़े विवाद में मध्य प्रदेश को बड़ा झटका लगा है। नर्मदा जल विवाद न्यायाधिकरण (Narmada Water Disputes Tribunal) के फैसले के बाद मध्य प्रदेश का 7,669 करोड़ रुपये का दावा खारिज हो गया है। वहीं, अब राज्य को गुजरात को करीब 550 करोड़ रुपये का भुगतान करना होगा।

मामला नर्मदा नदी के पानी और उससे जुड़े खर्चों के बंटवारे से संबंधित है। मध्य प्रदेश सरकार की ओर से लंबे समय से इस राशि पर दावा किया जा रहा था, लेकिन अब इसे स्वीकार नहीं किया गया है।

मध्य प्रदेश के दावे पर नहीं मिली मंजूरी

मध्य प्रदेश ने नर्मदा परियोजनाओं से जुड़े खर्च और अन्य मदों को लेकर गुजरात से 7,669 करोड़ रुपये की मांग की थी। राज्य का तर्क था कि इन खर्चों की भरपाई की जानी चाहिए।

हालांकि, संबंधित प्राधिकरण और विवाद समाधान प्रक्रिया में मध्य प्रदेश के इस दावे को मान्यता नहीं मिली। इसके बाद अब राज्य को आर्थिक रूप से नुकसान उठाना पड़ेगा।

गुजरात को देना होगा भुगतान

फैसले के अनुसार, मध्य प्रदेश को गुजरात को लगभग 550 करोड़ रुपये देने होंगे। यह राशि नर्मदा जल समझौते और परियोजनाओं से जुड़े विभिन्न वित्तीय प्रावधानों के तहत तय की गई है।

इस फैसले के बाद राज्य सरकार के सामने अब भुगतान की व्यवस्था करना एक बड़ी चुनौती होगी।

नर्मदा विवाद का पुराना इतिहास

नर्मदा जल विवाद कई दशकों पुराना है। नर्मदा नदी के पानी के बंटवारे को लेकर मध्य प्रदेश, गुजरात, महाराष्ट्र और राजस्थान के बीच लंबे समय तक विवाद चलता रहा है।

इस विवाद के समाधान के लिए नर्मदा जल विवाद न्यायाधिकरण का गठन किया गया था, जिसने राज्यों के बीच पानी के बंटवारे और परियोजनाओं से जुड़े कई मुद्दों पर निर्णय दिए।

सरकार के लिए बढ़ी चुनौती

इस फैसले के बाद मध्य प्रदेश सरकार को वित्तीय मोर्चे पर नई चुनौती का सामना करना पड़ेगा। विपक्ष भी इस मुद्दे को लेकर सरकार पर सवाल उठा सकता है और फैसले की समीक्षा की मांग कर सकता है।

वहीं, सरकार की ओर से इस मामले में आगे की रणनीति और भुगतान प्रक्रिया को लेकर जल्द स्थिति स्पष्ट किए जाने की संभावना है।