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नपा अध्यक्ष के बेटे पर कुर्सी संभालने का आरोप, पार्षदों ने दफ्तर में किया हंगामा; विशेष सम्मेलन बुलाने की मांग

 

दतिया नगर पालिका में शुक्रवार को उस समय हंगामा हो गया, जब कुछ पार्षदों ने नगर पालिका अध्यक्ष के बेटे पर कार्यालय में अध्यक्ष की कुर्सी संभालने का आरोप लगाया। पार्षदों ने इसको लेकर नाराजगी जताते हुए नगर पालिका कार्यालय में विरोध प्रदर्शन किया। उनका आरोप है कि निर्वाचित अध्यक्ष की गैरमौजूदगी में उनके बेटे का कार्यालय में बैठकर कामकाज में दखल देना उचित नहीं है।

विवाद के बाद पार्षदों ने नगर पालिका प्रशासन के सामने अपनी आपत्ति दर्ज कराई और पूरे मामले को लेकर धारा 57 के तहत विशेष सम्मेलन बुलाने की मांग की। पार्षदों का कहना है कि नगर पालिका का कामकाज नियमों और निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार होना चाहिए।

अध्यक्ष की कुर्सी पर बैठने का आरोप

पार्षदों के अनुसार नगर पालिका कार्यालय में अध्यक्ष की कुर्सी पर उनके बेटे के बैठने को लेकर विवाद शुरू हुआ। पार्षदों ने इस पर सवाल उठाते हुए कहा कि अध्यक्ष पद निर्वाचित जनप्रतिनिधि का होता है और किसी अन्य व्यक्ति द्वारा उस कुर्सी पर बैठना उचित नहीं है।

मामले की जानकारी मिलते ही कई पार्षद कार्यालय में एकत्रित हो गए। देखते ही देखते वहां हंगामे की स्थिति बन गई। पार्षदों ने अपनी नाराजगी जाहिर करते हुए नगर पालिका के कामकाज को लेकर भी सवाल उठाए।

धारा 57 के तहत सम्मेलन की मांग

पार्षदों ने नगर पालिका अधिनियम की धारा 57 के तहत विशेष सम्मेलन बुलाने की मांग रखी है। उनका कहना है कि विशेष सम्मेलन में पूरे मामले पर चर्चा होनी चाहिए और नगर पालिका के कामकाज से जुड़े महत्वपूर्ण मुद्दों पर स्थिति स्पष्ट की जानी चाहिए।

पार्षदों का आरोप है कि नगर पालिका के प्रशासनिक कामकाज में निर्वाचित प्रतिनिधियों के अलावा किसी अन्य व्यक्ति का हस्तक्षेप नहीं होना चाहिए। उन्होंने इस मामले में अधिकारियों से नियमों के अनुसार कार्रवाई की मांग की है।

राजनीतिक खींचतान के संकेत

नगर पालिका में हुए इस विवाद को स्थानीय राजनीतिक खींचतान से जोड़कर भी देखा जा रहा है। पार्षदों और अध्यक्ष पक्ष के बीच पहले से किसी मुद्दे को लेकर मतभेद हैं या नहीं, यह जांच के बाद स्पष्ट होगा। फिलहाल कुर्सी पर बैठने के आरोप ने विवाद को और बढ़ा दिया है।

नगर पालिका कार्यालय में हुए हंगामे के बाद स्थानीय स्तर पर भी यह मामला चर्चा का विषय बना हुआ है। पार्षदों का कहना है कि नगर पालिका का संचालन पारदर्शी तरीके से होना चाहिए और सभी निर्णय नियमों के अनुसार लिए जाने चाहिए।

अब देखना होगा कि धारा 57 के तहत विशेष सम्मेलन बुलाने की मांग पर नगर पालिका प्रशासन क्या कदम उठाता है। यदि सम्मेलन बुलाया जाता है तो बैठक में पार्षद इस पूरे मामले को लेकर अपनी आपत्तियां रख सकते हैं। फिलहाल विवाद को लेकर दोनों पक्षों के रुख और प्रशासन की अगली कार्रवाई पर नजर बनी हुई है।