मिनी ट्रक भर फाइलें लेकर हाईकोर्ट पहुंचा नगर निगम, 5 साल की सड़कों का मांगा गया हिसाब; अब होगी ऑन-स्पॉट जांच
शहर की सड़कों की बदहाल स्थिति को लेकर हाईकोर्ट में चल रही सुनवाई के बीच नगर निगम को अब पिछले पांच साल के सड़क निर्माण कार्यों का पूरा रिकॉर्ड पेश करना पड़ा। नगर निगम की ओर से मिनी ट्रक भरकर फाइलें हाईकोर्ट पहुंचाई गईं। इन दस्तावेजों में सड़क निर्माण, मरम्मत और गुणवत्ता से जुड़े रिकॉर्ड शामिल बताए जा रहे हैं।
मामले में हाईकोर्ट ने शहर की सड़कों की स्थिति को गंभीरता से लेते हुए 5 साल में बनी सड़कों का हिसाब मांगा था। निगम से पूछा गया कि कितनी सड़कों का निर्माण हुआ, उनकी गुणवत्ता कैसी है और वर्तमान में कितनी सड़कें उपयोग के योग्य स्थिति में हैं।
129 सड़कों में सिर्फ 62 चलने लायक
सुनवाई के दौरान सामने आए आंकड़ों के अनुसार, कुल 129 सड़कों की स्थिति की समीक्षा की गई, जिनमें से केवल 62 सड़कें ही चलने लायक पाई गईं। बाकी सड़कों की हालत खराब बताई गई है। इस स्थिति को लेकर कोर्ट ने नाराजगी जताते हुए सड़कों की वास्तविक स्थिति की जांच के निर्देश दिए हैं।
नगर निगम द्वारा पेश किए गए रिकॉर्ड के आधार पर अब सड़कों की ऑन-स्पॉट जांच कराई जाएगी। जांच टीम मौके पर जाकर यह देखेगी कि दस्तावेजों में दर्ज जानकारी और जमीनी हकीकत में कितना अंतर है।
फाइलों के साथ पहुंचा निगम अमला
हाईकोर्ट में नगर निगम की ओर से बड़ी संख्या में दस्तावेज पेश किए गए। फाइलों की संख्या इतनी अधिक थी कि उन्हें मिनी ट्रक के माध्यम से अदालत तक लाना पड़ा। इसका वीडियो भी सामने आया है, जिसमें बड़ी संख्या में फाइलें ले जाते हुए दिखाई दे रही हैं।
इन रिकॉर्ड में सड़क निर्माण से जुड़े टेंडर, भुगतान, मरम्मत कार्य और अन्य दस्तावेज शामिल हैं। कोर्ट अब इन दस्तावेजों और मौके की जांच के आधार पर आगे की कार्रवाई करेगा।
सड़क निर्माण की गुणवत्ता पर सवाल
सड़कों की खराब स्थिति को लेकर लंबे समय से शिकायतें सामने आती रही हैं। बारिश के बाद कई जगहों पर गड्ढे और सड़क क्षतिग्रस्त होने की समस्या बढ़ जाती है। ऐसे में सड़क निर्माण की गुणवत्ता और निगरानी व्यवस्था पर सवाल उठ रहे हैं।
हाईकोर्ट की सख्ती के बाद नगर निगम के लिए अब यह साबित करना चुनौती होगी कि सड़क निर्माण कार्यों में नियमों का पालन किया गया है और जनता के पैसे का सही उपयोग हुआ है।
अब मौके पर होगी जांच
हाईकोर्ट के निर्देश के बाद अब संबंधित सड़कों की वास्तविक स्थिति जानने के लिए मौके पर निरीक्षण किया जाएगा। जांच के दौरान सड़क की गुणवत्ता, निर्माण सामग्री और वर्तमान स्थिति का मूल्यांकन किया जाएगा।
यदि जांच में किसी तरह की अनियमितता सामने आती है तो जिम्मेदार अधिकारियों और ठेकेदारों पर कार्रवाई की जा सकती है। फिलहाल मामले में नगर निगम द्वारा पेश किए गए दस्तावेजों और होने वाली ऑन-स्पॉट जांच पर सभी की नजरें टिकी हुई हैं।