भोपाल में मुफ्ती गुफरान का बयान, बोले- ‘शरीयत से टकराने वाला कानून स्वीकार नहीं’; UCC समर्थकों को लेकर उठाए सवाल
भोपाल में यूनिफॉर्म सिविल कोड यानी UCC को लेकर धार्मिक बहस एक बार फिर सामने आई है। मुफ्ती गुफरान ने कहा है कि मुस्लिम समुदाय के लिए शरीयत से टकराने वाला कोई कानून स्वीकार नहीं किया जा सकता। उन्होंने UCC के समर्थकों को सार्वजनिक कार्यक्रमों में मुख्य अतिथि बनाए जाने को लेकर भी सवाल उठाए हैं। साथ ही उन्होंने भोपाल के शहर काजी की भूमिका पर भी सवाल खड़े किए।
मुफ्ती गुफरान का यह बयान ऐसे समय में सामने आया है, जब देश में समान नागरिक संहिता को लेकर अलग-अलग राजनीतिक और सामाजिक संगठनों के बीच चर्चा जारी है।
‘शरीयत से टकराने वाला कानून स्वीकार नहीं’
मुफ्ती गुफरान ने अपने बयान में कहा कि मुस्लिम समुदाय के धार्मिक और व्यक्तिगत मामलों में शरीयत का महत्वपूर्ण स्थान है। उन्होंने कहा कि ऐसा कोई कानून, जो शरीयत के सिद्धांतों से टकराता हो, उसे स्वीकार करना मुस्लिम समाज के लिए संभव नहीं है।
उन्होंने UCC को लेकर अपनी आपत्ति जाहिर करते हुए कहा कि व्यक्तिगत कानूनों से जुड़े मामलों में धार्मिक मान्यताओं को नजरअंदाज नहीं किया जाना चाहिए।
UCC समर्थकों को चीफ गेस्ट बनाने पर सवाल
मुफ्ती गुफरान ने सार्वजनिक कार्यक्रमों में UCC का समर्थन करने वाले लोगों को मुख्य अतिथि बनाए जाने पर भी सवाल उठाया। उन्होंने पूछा कि जो लोग ऐसे कानून का समर्थन करते हैं, उन्हें धार्मिक या सामाजिक कार्यक्रमों में मुख्य अतिथि बनाना किस तरह उचित है।
उन्होंने कहा कि इस तरह के आयोजनों में अतिथियों के चयन को लेकर आयोजकों को समुदाय की भावनाओं का भी ध्यान रखना चाहिए। उनके बयान के बाद यह मुद्दा स्थानीय स्तर पर चर्चा में आ गया है।
शहर काजी की भूमिका पर भी उठाए सवाल
मुफ्ती गुफरान ने भोपाल के शहर काजी को लेकर भी सवाल उठाए। उन्होंने धार्मिक नेतृत्व की भूमिका और समुदाय से जुड़े मुद्दों पर लिए जाने वाले फैसलों को लेकर अपनी आपत्ति जताई।
उन्होंने कहा कि धार्मिक मामलों में नेतृत्व करने वाले लोगों को समुदाय की भावनाओं और धार्मिक सिद्धांतों को ध्यान में रखकर अपनी भूमिका निभानी चाहिए। हालांकि शहर काजी की ओर से इस बयान पर क्या प्रतिक्रिया सामने आती है, यह स्पष्ट नहीं है।
UCC पर देशभर में जारी है बहस
समान नागरिक संहिता का उद्देश्य देश के सभी नागरिकों के लिए विवाह, तलाक, उत्तराधिकार और अन्य व्यक्तिगत मामलों में एक समान कानूनी व्यवस्था लागू करना है। इसे लेकर समर्थकों का तर्क है कि समान कानून से देश में कानूनी समानता मजबूत होगी।
वहीं, विरोध करने वाले संगठनों और धार्मिक प्रतिनिधियों का कहना है कि व्यक्तिगत कानूनों में धार्मिक और सांस्कृतिक विविधताओं का सम्मान किया जाना चाहिए। इसी मुद्दे को लेकर समय-समय पर राजनीतिक और सामाजिक बहस होती रही है।
बयान के बाद बढ़ी चर्चा
भोपाल में मुफ्ती गुफरान के बयान ने UCC और धार्मिक स्वतंत्रता से जुड़े सवालों को फिर चर्चा में ला दिया है। उन्होंने स्पष्ट रूप से शरीयत से टकराने वाले कानून को स्वीकार नहीं करने की बात कही है।
अब इस बयान पर दूसरे धार्मिक नेताओं, सामाजिक संगठनों और शहर काजी की प्रतिक्रिया का इंतजार है। फिलहाल बयान के बाद भोपाल में UCC और धार्मिक मामलों से जुड़े मुद्दों पर बहस तेज हो गई है।