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MP Missing Minor Girls Report: मध्य प्रदेश में रोज 40 नाबालिग बच्चियां लापता, इंदौर सबसे ऊपर

 

मध्य प्रदेश में नाबालिग बच्चियों के लापता होने के आंकड़ों ने चिंता बढ़ा दी है। पुलिस मुख्यालय (PHQ) की महिला शाखा के आंकड़ों के मुताबिक, 2026 के शुरुआती आठ महीनों में प्रदेश में नाबालिग बच्चियों के लापता होने के 9,760 नए मामले दर्ज किए गए। यानी औसतन हर दिन करीब 40 बच्चियों के गायब होने की शिकायत पुलिस तक पहुंची। पुराने लंबित मामलों को जोड़ने पर कुल प्रकरणों की संख्या 12,387 रही।

3303 बच्चियां अब भी लापता

पुलिस के अनुसार, इस अवधि में कुल 9,084 बच्चियों को तलाश लिया गया। इससे रिकवरी दर 93 फीसदी से अधिक बताई गई है। हालांकि, पुराने और नए मामलों को मिलाकर 3,303 बच्चियां अभी भी लापता हैं। आंकड़ों के मुताबिक, लापता बच्चों में लड़कियों की संख्या लड़कों की तुलना में करीब तीन गुना है।

इंदौर में सबसे ज्यादा लंबित मामले

PHQ के आंकड़ों में इंदौर सबसे ऊपर है। यहां 772 नाबालिग बच्चियों के मामले लंबित बताए गए हैं। इसके बाद धार में 559 और जबलपुर में 504 मामले हैं। भोपाल में 493 और सागर में 439 बच्चियों के मामले लंबित हैं। रतलाम में भी 417 मामले दर्ज हैं।

इस आंकड़े में ध्यान देने वाली बात यह है कि ये जिले में दर्ज लंबित मामलों की संख्या है, न कि केवल 2026 में दर्ज नई गुमशुदगी का आंकड़ा। इसलिए इसे रोजाना होने वाली गुमशुदगी की जिला-वार दर के तौर पर नहीं देखा जाना चाहिए।

पांच साल के आंकड़ों में भी चिंता

पुलिस रिकॉर्ड के अनुसार, 2021 के अंत में प्रदेश में 2,830 नाबालिग बच्चियां लापता थीं। 2022 में यह संख्या 2,944, 2023 में 3,764 और 2024 में बढ़कर 4,001 हो गई। 2025 में पुलिस के विशेष अभियान के बाद लंबित मामलों की संख्या घटकर 2,627 रह गई थी। लेकिन 2026 के शुरुआती आठ महीनों में यह संख्या फिर बढ़कर 3,303 हो गई।

पुलिस ने शुरू की विशेष निगरानी

बच्चियों की गुमशुदगी के मामलों को लेकर पुलिस मुख्यालय की महिला शाखा लगातार जिलों की निगरानी कर रही है। रिपोर्ट के मुताबिक, जिलों के प्रदर्शन के आधार पर समीक्षा की जा रही है और जरूरत के अनुसार दूसरे राज्यों में भी विशेष पुलिस टीमें भेजकर लापता बच्चियों की तलाश की जा रही है। अधिकारियों के मुताबिक, लंबित मामलों में बच्चियों को तलाशने की कार्रवाई लगातार जारी है।

वहीं, 2026 में सामने आए ये आंकड़े एक बड़े सामाजिक और प्रशासनिक मुद्दे की ओर भी ध्यान खींचते हैं। पुलिस के मुताबिक बड़ी संख्या में बच्चियों को तलाश लिया गया है, लेकिन हजारों मामले अभी भी लंबित हैं। ऐसे में गुमशुदगी की शिकायतों पर तेजी से कार्रवाई और लंबित मामलों की प्रभावी जांच अहम बनी हुई है।