MP हाईकोर्ट के जस्टिस अवनीन्द्र कुमार सिंह 17 सितंबर को होंगे रिटायर, 15 पद रहेंगे खाली
मध्य प्रदेश हाईकोर्ट की प्रिंसिपल बेंच जबलपुर में पदस्थ जस्टिस अवनीन्द्र कुमार सिंह 17 सितंबर 2026 को सेवानिवृत्त हो जाएंगे। उनके रिटायरमेंट के बाद मध्य प्रदेश हाईकोर्ट में कार्यरत न्यायाधीशों की संख्या घटकर 38 रह जाएगी। हाईकोर्ट में न्यायाधीशों के कुल 53 पद स्वीकृत हैं। इस लिहाज से जस्टिस अवनीन्द्र कुमार सिंह के सेवानिवृत्त होने के बाद 15 पद खाली रह जाएंगे।
जस्टिस अवनीन्द्र कुमार सिंह हाईकोर्ट की प्रिंसिपल बेंच में पदस्थ हैं। 17 सितंबर को उनके कार्यकाल की समाप्ति के साथ ही न्यायाधीशों की संख्या में एक और कमी हो जाएगी। इससे हाईकोर्ट में स्वीकृत पदों और कार्यरत न्यायाधीशों की संख्या के बीच अंतर और बढ़ जाएगा।
मध्य प्रदेश हाईकोर्ट में न्यायाधीशों के कुल 53 स्वीकृत पद हैं। इनमें से 38 पदों पर न्यायाधीश कार्यरत रह जाएंगे, जबकि 15 पद रिक्त होंगे। यानी स्वीकृत न्यायिक क्षमता की तुलना में हाईकोर्ट में करीब 28 फीसदी पद खाली रहेंगे।
न्यायाधीशों के पद रिक्त होने का सीधा संबंध लंबित मामलों की सुनवाई और उनके निपटारे की प्रक्रिया से भी जुड़ा है। हाईकोर्ट में बड़ी संख्या में आपराधिक, सिविल, संवैधानिक और अन्य प्रकार के मामले सुनवाई के लिए आते हैं। ऐसे में न्यायाधीशों की संख्या कम होने से अलग-अलग मामलों की सुनवाई के लिए उपलब्ध न्यायिक क्षमता प्रभावित हो सकती है।
जस्टिस अवनीन्द्र कुमार सिंह के सेवानिवृत्त होने के बाद हाईकोर्ट में रिक्त पदों को भरने की प्रक्रिया पर भी नजर रहेगी। नए न्यायाधीशों की नियुक्ति की प्रक्रिया संवैधानिक और न्यायिक व्यवस्था के तहत आगे बढ़ती है। नियुक्ति होने तक रिक्त पदों की वजह से स्वीकृत संख्या के मुकाबले कम न्यायाधीशों के साथ ही हाईकोर्ट को काम करना होगा।
हाईकोर्ट में न्यायाधीशों की स्वीकृत संख्या और वास्तविक कार्यबल के बीच अंतर लंबे समय से न्यायिक प्रशासन से जुड़ा महत्वपूर्ण विषय रहा है। रिक्त पदों को भरने से अदालतों की कार्यक्षमता बढ़ाने और मामलों की सुनवाई के लिए उपलब्ध न्यायिक संसाधनों में इजाफा किया जा सकता है।
जस्टिस अवनीन्द्र कुमार सिंह के रिटायरमेंट के साथ ही मध्य प्रदेश हाईकोर्ट के न्यायिक प्रशासन में एक और बदलाव होगा। 17 सितंबर के बाद हाईकोर्ट में 38 न्यायाधीश कार्यरत रह जाएंगे और 15 स्वीकृत पद रिक्त होंगे। अब इन रिक्त पदों पर नियुक्ति कब होती है, इस पर न्यायिक क्षेत्र की नजर रहेगी।