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मध्य प्रदेश में मानसून की रफ्तार धीमी, अब तक 25.5 इंच बारिश; 40 जिलों में औसत से कम बरसा पानी

 

मध्य प्रदेश में इस मानसूनी सीजन में अब तक औसत 25.5 इंच बारिश दर्ज की गई है। यह प्रदेश के कुल सामान्य बारिश कोटे का करीब 68 प्रतिशत है। हालांकि, अभी भी प्रदेश में बारिश का आंकड़ा सामान्य से पीछे चल रहा है। अब तक करीब 11 प्रतिशत कम बारिश रिकॉर्ड की गई है, जिसके कारण राज्य के कई जिलों में पानी की कमी की स्थिति बनी हुई है।

मौसम विभाग के आंकड़ों के अनुसार प्रदेश के 40 जिलों में अब तक सामान्य से कम बारिश हुई है। वहीं, केवल 15 जिले ऐसे हैं, जहां मानसून ने सामान्य से ज्यादा मेहरबानी दिखाई है। कम बारिश वाले जिलों में किसानों की चिंता बढ़ने लगी है, क्योंकि खरीफ फसलों के लिए पर्याप्त बारिश बेहद जरूरी मानी जाती है।

प्रदेश के कई हिस्सों में पिछले कुछ दिनों से बारिश का दौर कमजोर पड़ा था। हालांकि अब मौसम विभाग ने कई संभागों में दोबारा बारिश की गतिविधियां बढ़ने की संभावना जताई है। भोपाल, उज्जैन और ग्वालियर संभाग सहित कई क्षेत्रों में तेज बारिश होने के संकेत हैं। इसके अलावा सागर और चंबल संभाग में भी बारिश का असर देखने को मिल सकता है।

बारिश की कमी का असर खेती पर भी पड़ सकता है। हालांकि प्रदेश में अब तक हुई बारिश से अधिकांश क्षेत्रों में बोवनी का काम पूरा हो चुका है, लेकिन जिन इलाकों में कम पानी गिरा है, वहां फसलों की स्थिति को लेकर किसानों की चिंता बढ़ गई है। सोयाबीन, धान और अन्य खरीफ फसलों को बेहतर उत्पादन के लिए लगातार बारिश की जरूरत है।

मौसम विशेषज्ञों के अनुसार मानसून अभी सक्रिय है और आने वाले दिनों में अच्छी बारिश होने की संभावना बनी हुई है। यदि अगले कुछ सप्ताह में प्रदेश में पर्याप्त बारिश होती है तो बारिश की कमी काफी हद तक पूरी हो सकती है।

प्रदेश में मानसून की कुल स्थिति पर नजर डालें तो अब तक 25.5 इंच बारिश हो चुकी है, लेकिन सामान्य आंकड़े तक पहुंचने के लिए अभी और बारिश की आवश्यकता है। प्रशासन और मौसम विभाग लगातार बारिश की स्थिति पर नजर बनाए हुए हैं। किसानों को भी मौसम विभाग की सलाह के अनुसार खेती से जुड़े फैसले लेने की अपील की जा रही है।