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ग्वालियर के मेडिकल कॉलेज में MBBS छात्र एनाटॉमी में एक अंक से फेल: पूरक परीक्षा में मिले 32 अंक, ग्रेस मार्क्स की मांग

 

ग्वालियर के गजरा राजा मेडिकल कॉलेज में एमबीबीएस प्रथम वर्ष के छात्र राम नरेश कुशवाहा एनाटॉमी विषय में एक अंक से फेल हो गए। छात्र ने पूरक परीक्षा भी दी, जिसमें उन्हें 32 अंक मिले। इसके बाद उन्होंने परीक्षा परिणाम में राहत देने और ग्रेस मार्क्स के जरिए पास करने की मांग की। मामला हाईकोर्ट तक पहुंचा, जहां ग्रेस मार्क्स दिए जाने को लेकर कानूनी प्रावधानों पर विचार किया गया।

जानकारी के अनुसार, राम नरेश कुशवाहा एमबीबीएस प्रथम वर्ष में अध्ययनरत हैं। प्रथम वर्ष की परीक्षा में एनाटॉमी विषय में वह निर्धारित न्यूनतम अंकों से एक अंक पीछे रह गए। इसके बाद उन्हें पूरक परीक्षा में शामिल होने का मौका मिला। पूरक परीक्षा में छात्र को 32 अंक प्राप्त हुए, लेकिन वह फिर भी निर्धारित पासिंग मानक पूरा नहीं कर सके।

छात्र की ओर से राहत की मांग करते हुए कहा गया कि वह पास होने के बेहद करीब हैं। ऐसे में उन्हें एक अंक का ग्रेस मार्क देकर परीक्षा में उत्तीर्ण घोषित किया जाना चाहिए। छात्र ने इसी आधार पर संबंधित प्राधिकरण के समक्ष अपनी मांग रखी और बाद में न्यायालय का रुख किया।

मामले में कोर्ट के समक्ष परीक्षा नियमों और ग्रेस मार्क्स से जुड़े प्रावधानों का मुद्दा आया। अदालत ने माना कि किसी छात्र को केवल इसलिए अतिरिक्त अंक नहीं दिए जा सकते कि वह मामूली अंतर से परीक्षा में असफल हुआ है। ग्रेस मार्क्स देने के लिए संबंधित नियमों में स्पष्ट प्रावधान होना आवश्यक है।

मेडिकल शिक्षा में परीक्षा पास करने के लिए निर्धारित न्यूनतम अंक हासिल करना जरूरी होता है। एनाटॉमी एमबीबीएस प्रथम वर्ष का महत्वपूर्ण विषय है। परीक्षा परिणाम और पूरक परीक्षा में प्राप्त अंकों के आधार पर ही छात्र की पात्रता तय की जाती है।

छात्र की ओर से यह भी तर्क दिया गया कि एक अंक की कमी के कारण उनका अगला शैक्षणिक चरण प्रभावित हो सकता है। हालांकि, परीक्षा में अतिरिक्त अंक देने का निर्णय संबंधित नियमों के अनुसार ही किया जा सकता है।

यह मामला मेडिकल छात्रों के लिए परीक्षा नियमों और ग्रेस मार्क्स के प्रावधानों को लेकर महत्वपूर्ण है। अदालत का रुख यह है कि केवल एक अंक से फेल होने को अपने आप अतिरिक्त अंक देने का आधार नहीं माना जा सकता। यदि परीक्षा नियमों में ग्रेस मार्क्स की व्यवस्था नहीं है, तो केवल सहानुभूति के आधार पर अंक बढ़ाकर छात्र को पास नहीं किया जा सकता।

राम नरेश कुशवाहा को पूरक परीक्षा में 32 अंक मिले थे। अब मामले में आगे की स्थिति संबंधित परीक्षा नियमों और न्यायालय के आदेश के अनुसार तय होगी।