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भोजशाला विवाद पर मौलाना शहाबुद्दीन बरेलवी का बयान: “हिंदू पक्ष को बहुत खुशी मनाने की जरूरत नहीं”

 

मध्य प्रदेश के धार स्थित ऐतिहासिक भोजशाला परिसर को लेकर चल रहे विवाद के बीच मुस्लिम धर्मगुरु मौलाना शहाबुद्दीन बरेलवी का बड़ा बयान सामने आया है। उन्होंने इस मामले में हालिया घटनाक्रम पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा है कि “हिंदू पक्ष को बहुत ज्यादा खुशी मनाने की जरूरत नहीं है।” उनके इस बयान के बाद एक बार फिर भोजशाला विवाद को लेकर राजनीतिक और सामाजिक हलकों में चर्चा तेज हो गई है।

मौलाना शहाबुद्दीन बरेलवी ने मीडिया से बातचीत के दौरान कहा कि भोजशाला मामला अभी पूरी तरह से अंतिम निष्कर्ष पर नहीं पहुंचा है और कानूनी प्रक्रिया जारी है। उन्होंने कहा कि ऐसे संवेदनशील मामलों में किसी भी पक्ष को जल्दबाजी में उत्सव या निष्कर्ष निकालने से बचना चाहिए। उनके अनुसार, अदालत या सक्षम प्राधिकरण का अंतिम निर्णय ही सभी के लिए मान्य होगा।

उन्होंने आगे कहा कि देश में धार्मिक स्थलों से जुड़े विवादों को बातचीत और कानूनी दायरे में रहकर ही सुलझाया जाना चाहिए। किसी भी प्रकार की भावनात्मक प्रतिक्रिया या अत्यधिक उत्साह माहौल को तनावपूर्ण बना सकता है। मौलाना बरेलवी ने जोर देकर कहा कि सभी समुदायों को संयम और शांति बनाए रखनी चाहिए ताकि सामाजिक सौहार्द प्रभावित न हो।

भोजशाला विवाद लंबे समय से चर्चा में है, जहां एक पक्ष इसे हिंदू देवी सरस्वती का प्राचीन मंदिर मानता है, जबकि मुस्लिम पक्ष इसे एक ऐतिहासिक मस्जिद या इस्लामिक स्थल के रूप में देखता है। इसी मुद्दे पर अदालत में मामला विचाराधीन है और भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) की निगरानी में समय-समय पर सर्वे और अन्य प्रक्रियाएं भी की जाती रही हैं।

मौलाना शहाबुद्दीन बरेलवी के बयान को इसी संदर्भ में देखा जा रहा है, जिसमें उन्होंने संकेत दिया है कि किसी भी तरह की जल्दबाजी या एकतरफा निष्कर्ष समाज में गलत संदेश दे सकता है। उन्होंने यह भी कहा कि देश की गंगा-जमुनी तहजीब को बनाए रखना सभी की जिम्मेदारी है और इसके लिए आपसी सम्मान बेहद जरूरी है।

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि भोजशाला जैसे संवेदनशील मुद्दों पर दिए गए ऐसे बयान अक्सर सामाजिक और राजनीतिक बहस को और अधिक तेज कर देते हैं। वहीं कुछ लोग इसे शांति बनाए रखने की अपील के रूप में भी देख रहे हैं।

फिलहाल भोजशाला मामला न्यायालय में विचाराधीन है और अंतिम निर्णय आने तक सभी पक्षों से संयम बरतने की अपील की जा रही है। इस बीच मौलाना शहाबुद्दीन बरेलवी का यह बयान एक बार फिर इस विवाद को सुर्खियों में ले आया है।