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मातृ-पितृ भक्ति दिवस: युवाओं को संस्कारों से जोड़ रहा मंत्री विश्वास सारंग का अभियान

 

बदलते सामाजिक परिवेश और आधुनिक जीवनशैली के बीच युवाओं को भारतीय संस्कृति, पारिवारिक मूल्यों और सेवा भाव से जोड़ने के उद्देश्य से चलाया जा रहा "मातृ-पितृ भक्ति दिवस" अभियान लोगों का ध्यान आकर्षित कर रहा है। इस पहल को लेकर प्रदेश के मंत्री Vishvas Sarang का कहना है कि माता-पिता का सम्मान और बुजुर्गों की सेवा भारतीय संस्कृति की मूल पहचान है।

आधुनिकता और संस्कारों का संतुलन

अभियान का मुख्य उद्देश्य युवाओं को यह संदेश देना है कि आधुनिकता को अपनाने के साथ-साथ पारिवारिक संस्कारों और सामाजिक जिम्मेदारियों को भी महत्व देना आवश्यक है। कार्यक्रमों के माध्यम से युवाओं को परिवार के प्रति कर्तव्यों और बुजुर्गों के सम्मान की सीख दी जा रही है।

माता-पिता के सम्मान पर विशेष जोर

"मातृ-पितृ भक्ति दिवस" के तहत माता-पिता के प्रति आदर, कृतज्ञता और सेवा भाव को जीवन का महत्वपूर्ण हिस्सा बताया जा रहा है। अभियान में युवाओं को अपने माता-पिता के योगदान को समझने और उनके प्रति सम्मान व्यक्त करने के लिए प्रेरित किया जा रहा है।

बुजुर्गों की सेवा का संदेश

अभियान के माध्यम से समाज में बुजुर्गों की देखभाल और सम्मान की भावना को भी बढ़ावा दिया जा रहा है। आयोजकों का मानना है कि परिवार में बुजुर्गों का अनुभव और मार्गदर्शन नई पीढ़ी के लिए अमूल्य धरोहर है।

नैतिक मूल्यों को मिल रहा बढ़ावा

इस पहल को समाज में नैतिक मूल्यों, संवेदनशीलता और पारिवारिक एकता को मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। विभिन्न कार्यक्रमों और जनजागरूकता गतिविधियों के जरिए लोगों को पारिवारिक रिश्तों की अहमियत समझाई जा रही है।

युवाओं में सकारात्मक संदेश

अभियान से जुड़े लोगों का कहना है कि इससे युवाओं में सेवा, सम्मान और जिम्मेदारी की भावना विकसित हो रही है। साथ ही यह पहल परिवार और समाज के बीच मजबूत संबंधों को भी प्रोत्साहित कर रही है।

समाजशास्त्रियों का मानना है कि तेजी से बदलते समय में ऐसे अभियान पारिवारिक मूल्यों को मजबूत करने और नई पीढ़ी को अपनी सांस्कृतिक जड़ों से जोड़ने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।