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MP हाईकोर्ट का बड़ा फैसला, नैतिक अधमता के आधार पर बर्खास्त महिला ADPPO को राहत; गृह विभाग का आदेश रद्द

 

मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने एक महत्वपूर्ण फैसला सुनाते हुए राज्य के गृह विभाग के उस आदेश को रद्द कर दिया है, जिसमें एक महिला सहायक जिला लोक अभियोजन अधिकारी (ADPPO) को प्रोबेशन अवधि के दौरान नैतिक अधमता (Moral Turpitude) के आधार पर नौकरी से बर्खास्त कर दिया गया था। कोर्ट ने कहा कि सेवा समाप्ति की कार्रवाई उचित प्रक्रिया के तहत होनी चाहिए और केवल आरोपों के आधार पर किसी कर्मचारी को दंडित नहीं किया जा सकता।हाईकोर्ट के इस फैसले से महिला अधिकारी को बड़ी राहत मिली है। अदालत ने गृह विभाग की कार्रवाई को चुनौती देने वाली याचिका पर सुनवाई करते हुए बर्खास्तगी आदेश को निरस्त कर दिया।

प्रोबेशन पीरियड में की गई थी कार्रवाई

मामले के अनुसार, महिला ADPPO को नियुक्ति के बाद प्रोबेशन अवधि में रखा गया था। इसी दौरान गृह विभाग ने नैतिक अधमता से जुड़े आधारों का हवाला देते हुए उनकी सेवाएं समाप्त कर दी थीं।महिला अधिकारी ने इस कार्रवाई को हाईकोर्ट में चुनौती दी और कहा कि विभाग ने बिना उचित प्रक्रिया अपनाए और पर्याप्त अवसर दिए बिना बर्खास्तगी का फैसला लिया।

हाईकोर्ट ने उठाए प्रक्रिया पर सवाल

मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने मामले की सुनवाई के दौरान पाया कि सेवा समाप्ति की कार्रवाई में जरूरी कानूनी प्रक्रिया का पालन नहीं किया गया। कोर्ट ने माना कि किसी कर्मचारी के खिलाफ गंभीर आरोप होने पर भी निष्पक्ष जांच और सुनवाई का अवसर दिया जाना जरूरी है।अदालत ने कहा कि केवल आरोपों के आधार पर किसी व्यक्ति के करियर और प्रतिष्ठा पर असर डालने वाला फैसला नहीं लिया जा सकता।

गृह विभाग का आदेश किया रद्द

हाईकोर्ट ने गृह विभाग द्वारा जारी बर्खास्तगी आदेश को पूरी तरह रद्द कर दिया। कोर्ट के फैसले के बाद अब महिला ADPPO को राहत मिली है और विभागीय कार्रवाई पर सवाल खड़े हुए हैं।अदालत ने स्पष्ट किया कि सरकारी सेवा में अनुशासन और नैतिकता महत्वपूर्ण हैं, लेकिन कार्रवाई करते समय नियमों और प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों का पालन भी जरूरी है।

सरकारी कर्मचारियों के लिए अहम फैसला

मध्य प्रदेश हाईकोर्ट का यह निर्णय सरकारी कर्मचारियों के अधिकारों के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। इस फैसले से यह संदेश गया है कि किसी भी कर्मचारी के खिलाफ सेवा समाप्ति जैसी कठोर कार्रवाई करने से पहले निष्पक्ष प्रक्रिया अपनाना अनिवार्य है।अब इस मामले में आगे की कार्रवाई हाईकोर्ट के आदेश और विभागीय प्रक्रिया के अनुसार होगी।