एमओयू साइन करेंगे MP-महाराष्ट्र, देश की पहली भूमिगत जल संग्रह परियोजना
भारत में पहली बार ऐसा जल प्रबंधन मॉडल आकार ले रहा है, जो न केवल तकनीकी दृष्टि से अनूठा है, बल्कि इसके माध्यम से मध्य प्रदेश और महाराष्ट्र, दोनों राज्यों के लाखों किसानों को स्थायी सिंचाई सुविधा मिल सकेगी। इस परियोजना के संबंध में दोनों राज्यों के बीच शनिवार को भोपाल में एमओयू पर हस्ताक्षर किये जायेंगे। इस अवसर पर महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री देवेन्द्र फडणवीस भोपाल आएंगे और मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव से मुलाकात करेंगे। दोनों राज्यों के बीच समझौता ज्ञापन के बाद केंद्रीय जल शक्ति मंत्रालय इसे राष्ट्रीय परियोजना घोषित करेगा।
20 हजार करोड़ की परियोजना
लगभग 20,000 करोड़ रुपये की लागत से निर्मित इस परियोजना के तहत तापी नदी के बाढ़ के पानी को दो चट्टानों के बीच स्थित 250 वर्ग किलोमीटर के प्राकृतिक जलाशय में भूमिगत रूप से संग्रहित किया जाएगा। यह भूगर्भीय संरचना जल संरक्षण के लिए उपयुक्त मानी जा रही है और इससे 50 किलोमीटर के दायरे में प्रति वर्ष लगभग 2 मीटर भूजल स्तर में वृद्धि होगी।
दोनों राज्यों के 16 तालुकाओं को मिलेगा पानी
तापी नदी के बाढ़ के पानी को तीन धाराओं में विभाजित करने के लिए बुरहानपुर और जलगांव के बीच चोपड़ा क्षेत्र में एक छोटा बांध बनाया जाएगा, जिसकी नहरों से मध्य प्रदेश के दो जिलों की चार तालुकाओं और महाराष्ट्र के चार जिलों की 12 तालुकाओं, यानी कुल 16 तालुकाओं को पानी की आपूर्ति होगी। इन नहरों से मध्य प्रदेश में 1.33 लाख हेक्टेयर और महाराष्ट्र में 2.34 लाख हेक्टेयर भूमि को लाभ होगा।
केंद्र 100% वित्त पोषण प्रदान कर सकता है।
इस परियोजना के अंतर्गत कोई भूमि अधिग्रहण या पुनर्वास नहीं होगा, तथा इसका 100% वित्तपोषण केन्द्र सरकार द्वारा किया जाएगा। जल संसाधन विभाग के अधिकारियों के अनुसार यह मॉडल राष्ट्रीय जल परियोजनाओं के लिए एक नया उदाहरण साबित हो सकता है। ताप्ती बेसिन मेगा रिचार्ज परियोजना को कन-बेतवा और पीकेसी लिंक परियोजनाओं की तरह राष्ट्रीय परियोजना घोषित किए जाने की संभावना है, जिससे केंद्र की मंजूरी के बाद इसके क्रियान्वयन में तेजी आएगी।