Mahakal Darshan: सावन के चौथे सोमवार पर महाकाल मंदिर में उमड़ी आस्था, तड़के 2:30 बजे खुले कपाट
उज्जैन स्थित विश्व प्रसिद्ध श्री महाकालेश्वर मंदिर में सावन के चौथे और अंतिम सोमवार को श्रद्धालुओं की भारी भीड़ देखने को मिली। भगवान शिव को समर्पित सावन महीने के अंतिम सोमवार पर देशभर से भक्त बाबा महाकाल के दर्शन और भस्म आरती में शामिल होने के लिए उज्जैन पहुंचे। मंदिर परिसर में सुबह से ही हर-हर महादेव के जयकारे गूंजते रहे।सावन सोमवार के विशेष अवसर पर भगवान महाकाल की भस्म आरती के लिए मंदिर के कपाट तड़के 2:30 बजे खोले गए। इसके बाद मंदिर की पारंपरिक पूजा-अर्चना और धार्मिक अष्ठानों का क्रम शुरू हुआ। भस्म आरती को महाकाल मंदिर की सबसे प्रमुख और विशेष आरतियों में माना जाता है। इसे देखने के लिए देश के अलग-अलग हिस्सों से श्रद्धालु उज्जैन पहुंचते हैं।
वीरभद्र के कान में लिया गया आदेश
भस्म आरती की परंपरागत प्रक्रिया के तहत सभा मंडप में भगवान शिव के गण वीरभद्र के कान में स्वस्ति वाचन किया गया। धार्मिक परंपरा के अनुसार वीरभद्र से आज्ञा लेने के बाद आगे की पूजा प्रक्रिया शुरू की गई। इसके बाद चांदी का पट खोला गया और भगवान महाकाल की कर्पूर आरती की गई।पूजा की इस पारंपरिक प्रक्रिया में मंदिर की प्राचीन परंपराओं और धार्मिक विधि-विधान का विशेष ध्यान रखा गया। सावन के सोमवार को होने वाली पूजा के कारण मंदिर में विशेष धार्मिक वातावरण देखने को मिला।
नंदी हॉल में हुआ विशेष पूजन
भगवान महाकाल की पूजा से पहले नंदी हॉल में नंदी महाराज का स्नान, ध्यान और पूजन किया गया। श्रद्धालुओं के लिए नंदी दर्शन का भी विशेष महत्व माना जाता है। धार्मिक मान्यता के अनुसार भगवान शिव के दर्शन से पहले नंदी महाराज का दर्शन और उनके माध्यम से महादेव से मनोकामना प्रार्थना करने की परंपरा है।नंदी पूजन के बाद भगवान महाकाल की विधिवत आराधना की गई। मंदिर परिसर में मंत्रोच्चार और धार्मिक अनुष्ठानों के बीच भस्म आरती संपन्न हुई।
दर्शन के लिए लगी लंबी कतारें
सावन के चौथे सोमवार पर महाकालेश्वर मंदिर में दर्शन के लिए बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचे। मंदिर के बाहर और आसपास भक्तों की लंबी कतारें नजर आईं। श्रद्धालु अपनी बारी का इंतजार करते हुए भगवान महाकाल के जयकारे लगाते रहे।सावन का सोमवार भगवान शिव की आराधना के लिए विशेष माना जाता है। यही वजह है कि महाकाल मंदिर में इस दिन सामान्य दिनों की तुलना में श्रद्धालुओं की संख्या काफी बढ़ जाती है। भक्त भगवान महाकाल को जल और अन्य पूजन सामग्री अर्पित कर सुख-शांति और समृद्धि की कामना करते हैं।
सावन के अंतिम सोमवार पर खास उत्साह
सावन के चौथे सोमवार के साथ इस साल सावन के सोमवारों का क्रम पूरा हो गया। इस विशेष अवसर पर महाकाल मंदिर में सुबह से ही भक्तों का उत्साह देखने को मिला। भस्म आरती के बाद भी दर्शन के लिए श्रद्धालुओं का पहुंचना जारी रहा।महाकाल की नगरी उज्जैन में सावन के अंतिम सोमवार पर पूरा वातावरण शिवमय नजर आया। मंदिर की प्राचीन पूजा परंपराओं, भस्म आरती और भक्तों की आस्था ने इस धार्मिक अवसर को और विशेष बना दिया।