अनाज भंडारण में मध्य प्रदेश की बड़ी छलांग, पंजाब-हरियाणा को छोड़ा पीछे; 35 लाख मीट्रिक टन क्षमता के साथ देश के टॉप-5 राज्यों में शामिल
कृषि क्षेत्र में लगातार मजबूत हो रहे मध्य प्रदेश ने अब अनाज भंडारण के मामले में भी बड़ी उपलब्धि हासिल की है। राज्य ने इस क्षेत्र में पंजाब और हरियाणा जैसे पारंपरिक कृषि राज्यों को पीछे छोड़ते हुए नया मुकाम हासिल किया है। करीब 35 लाख मीट्रिक टन की भंडारण क्षमता के साथ मध्य प्रदेश देश के टॉप-5 राज्यों में शामिल हो गया है। इससे किसानों को अपनी उपज सुरक्षित रखने में मदद मिलेगी और फसल के नुकसान में भी कमी आएगी।
विशेषज्ञों के अनुसार, कृषि उत्पादन बढ़ने के साथ-साथ आधुनिक भंडारण सुविधाओं का विस्तार किसी भी राज्य की खाद्य सुरक्षा और कृषि अर्थव्यवस्था को मजबूत करने में अहम भूमिका निभाता है। मध्य प्रदेश में पिछले कुछ वर्षों में वेयरहाउस और आधुनिक गोदामों के निर्माण पर विशेष ध्यान दिया गया है, जिसका सकारात्मक परिणाम अब सामने आ रहा है।
राज्य की बढ़ती भंडारण क्षमता से गेहूं, धान, चना, सोयाबीन और अन्य खाद्यान्नों को लंबे समय तक सुरक्षित रखा जा सकेगा। इससे किसानों को अपनी उपज तुरंत कम कीमत पर बेचने की मजबूरी नहीं होगी। वे बेहतर बाजार भाव मिलने तक अनाज का सुरक्षित भंडारण कर सकेंगे, जिससे उनकी आय में भी बढ़ोतरी की संभावना है।
रिपोर्ट के मुताबिक, देश की कुल वैज्ञानिक अनाज भंडारण क्षमता का बड़ा हिस्सा चुनिंदा राज्यों के पास है। देश की कुल भंडारण क्षमता में लगभग 63 प्रतिशत हिस्सेदारी टॉप राज्यों की है, जिनमें मध्य प्रदेश ने अपनी मजबूत मौजूदगी दर्ज कराई है। यह उपलब्धि राज्य के कृषि बुनियादी ढांचे में हुए निवेश और बेहतर नीतियों का परिणाम मानी जा रही है।
विशेषज्ञों का मानना है कि आधुनिक वेयरहाउसिंग व्यवस्था केवल अनाज को सुरक्षित रखने तक सीमित नहीं है, बल्कि इससे खाद्यान्न की गुणवत्ता भी बनी रहती है। साथ ही परिवहन, वितरण और सार्वजनिक वितरण प्रणाली (PDS) को भी मजबूती मिलती है। इससे सरकारी खरीद व्यवस्था अधिक प्रभावी होती है और खाद्यान्न की बर्बादी कम होती है।
कृषि क्षेत्र से जुड़े जानकारों का कहना है कि मध्य प्रदेश पहले ही गेहूं, सोयाबीन, चना और दालों के उत्पादन में देश के अग्रणी राज्यों में शामिल है। अब भंडारण क्षमता में बढ़ोतरी से राज्य की कृषि आपूर्ति श्रृंखला (सप्लाई चेन) और अधिक मजबूत होगी। इसका सीधा लाभ किसानों, व्यापारियों और उपभोक्ताओं सभी को मिलेगा।
राज्य सरकार लगातार ग्रामीण क्षेत्रों में आधुनिक वेयरहाउस, साइलो और वैज्ञानिक भंडारण सुविधाओं के विकास पर जोर दे रही है। इससे फसल कटाई के बाद होने वाले नुकसान को कम करने और खाद्यान्न की गुणवत्ता बनाए रखने में मदद मिल रही है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि इसी गति से भंडारण ढांचे का विस्तार जारी रहा, तो आने वाले वर्षों में मध्य प्रदेश देश के सबसे मजबूत कृषि लॉजिस्टिक्स हब के रूप में भी उभर सकता है।
अनाज भंडारण क्षमता में मिली यह सफलता मध्य प्रदेश की कृषि विकास यात्रा का एक महत्वपूर्ण पड़ाव मानी जा रही है। यह उपलब्धि न केवल राज्य की खाद्य सुरक्षा को मजबूत करेगी, बल्कि किसानों की आय बढ़ाने और कृषि क्षेत्र को अधिक प्रतिस्पर्धी बनाने में भी अहम भूमिका निभाएगी।