मध्य प्रदेश के 15 हजार पुलिस अधिकारी-कर्मचारियों की पदोन्नति पर संकट, नए पदोन्नति नियम-2025 के बाद बढ़ी चिंता
मध्य प्रदेश पुलिस के लगभग 15 हजार अधिकारी और कर्मचारी, जो पिछले करीब पांच वर्षों से कार्यवाहक पदोन्नति के आधार पर उच्च पदों पर कार्यरत हैं, उनकी नियमित पदोन्नति अब संकट में पड़ती नजर आ रही है। मध्य प्रदेश पदोन्नति नियम-2025 लागू होने के बाद नियमित विभागीय पदोन्नति समिति (डीपीसी) की प्रक्रिया नए नियमों के तहत पूरी की जाएगी, जिससे बड़ी संख्या में पुलिसकर्मियों के भविष्य को लेकर असमंजस की स्थिति बन गई है।
जानकारी के अनुसार, प्रदेश में लंबे समय से नियमित पदोन्नति नहीं होने के कारण हजारों पुलिस अधिकारी और कर्मचारी कार्यवाहक पदोन्नति पर उच्च पदों की जिम्मेदारी संभाल रहे हैं। इन अधिकारियों को उम्मीद थी कि जल्द ही नियमित डीपीसी के माध्यम से उनकी पदोन्नति को स्थायी रूप मिल जाएगा, लेकिन नए नियम लागू होने के बाद प्रक्रिया में बदलाव की संभावना ने उनकी चिंताएं बढ़ा दी हैं।
सूत्रों के मुताबिक, नए पदोन्नति नियम लागू होने के बाद विभागीय पदोन्नति समिति अब संशोधित प्रावधानों के अनुसार पदोन्नति पर विचार करेगी। ऐसे में कार्यवाहक पदोन्नति पर कार्यरत कर्मचारियों की वरिष्ठता, पात्रता और चयन प्रक्रिया को लेकर कई नए सवाल खड़े हो गए हैं।
पुलिस विभाग से जुड़े अधिकारियों का मानना है कि यदि नियमित डीपीसी में देरी होती है या नए नियमों के कारण प्रक्रिया जटिल बनती है, तो लंबे समय से उच्च पदों पर कार्य कर रहे हजारों अधिकारी-कर्मचारियों को इसका सीधा असर झेलना पड़ सकता है। इससे न केवल उनके सेवा संबंधी अधिकार प्रभावित होंगे, बल्कि विभागीय मनोबल पर भी असर पड़ने की आशंका है।
पुलिस संगठनों और कर्मचारी प्रतिनिधियों का कहना है कि वर्षों से कार्यवाहक पदों पर जिम्मेदारी निभा रहे अधिकारियों और कर्मचारियों के हितों की रक्षा की जानी चाहिए। उनका मानना है कि नियमित पदोन्नति की प्रक्रिया पारदर्शी, समयबद्ध और कर्मचारियों के अधिकारों को ध्यान में रखते हुए पूरी की जानी चाहिए।
फिलहाल पुलिस मुख्यालय और संबंधित प्रशासनिक स्तर पर नए नियमों के तहत डीपीसी की प्रक्रिया को लेकर मंथन जारी है। सभी की निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि विभाग नियमित पदोन्नति की प्रक्रिया कब शुरू करता है और कार्यवाहक पदोन्नति पर कार्यरत कर्मचारियों के हितों को किस प्रकार सुरक्षित रखा जाता है।
मध्य प्रदेश में पदोन्नति से जुड़ा यह मामला आने वाले दिनों में प्रशासनिक और कर्मचारी संगठनों के बीच चर्चा का प्रमुख विषय बन सकता है, क्योंकि इसका प्रभाव हजारों पुलिस अधिकारी-कर्मचारियों के करियर और सेवा संरचना पर पड़ने की संभावना है।