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मध्य प्रदेश में अब तक 31.1 इंच बारिश दर्ज, 83.5% कोटा पूरा; 31 जिलों में अभी भी कम बारिश

 

मध्य प्रदेश में मानसून की स्थिति अब तक मिलीजुली बनी हुई है। प्रदेश में इस सीजन में औसत 31.1 इंच बारिश दर्ज की जा चुकी है, जो अब तक के सामान्य बारिश कोटे का करीब 83.5 प्रतिशत है। हालांकि प्रदेश के कई जिलों में अच्छी बारिश हुई है, वहीं कई इलाकों में अभी भी बारिश का आंकड़ा सामान्य से काफी पीछे चल रहा है।

मौसम विभाग के आंकड़ों के अनुसार, भोपाल समेत प्रदेश के 12 जिलों में सामान्य से ज्यादा बारिश हो चुकी है। इन जिलों में मानसून मेहरबान रहा है और बारिश का आंकड़ा औसत से ऊपर पहुंच गया है। इसके अलावा 12 अन्य जिले भी बेहतर स्थिति में हैं, जहां बारिश की स्थिति संतोषजनक बनी हुई है।

वहीं, प्रदेश के 31 जिलों में अब तक अपेक्षित बारिश नहीं हो पाई है। इन जिलों में किसानों को अभी भी अच्छी बारिश का इंतजार है। कम बारिश वाले क्षेत्रों में खेती-किसानी पर भी असर पड़ने की आशंका जताई जा रही है।

मौसम विशेषज्ञों के अनुसार, मानसून के दौरान बारिश का वितरण एक समान नहीं रहा है। कुछ इलाकों में लगातार बारिश हुई, जबकि कई जिलों में बादल तो छाए लेकिन अपेक्षित पानी नहीं बरसा। इसी वजह से प्रदेश के अलग-अलग हिस्सों में बारिश का अंतर देखने को मिल रहा है।

बारिश के आंकड़ों का सीधा असर खरीफ फसलों पर पड़ता है। जिन क्षेत्रों में पर्याप्त बारिश हुई है, वहां किसानों को राहत मिली है, जबकि कम बारिश वाले जिलों में किसान फसलों की सिंचाई को लेकर चिंतित हैं।

राजधानी भोपाल सहित कई जिलों में अच्छी बारिश के कारण जलाशयों और बांधों में भी पानी की स्थिति बेहतर हुई है। वहीं, कम बारिश वाले इलाकों में प्रशासन की नजर जल संसाधनों और खेती की स्थिति पर बनी हुई है।

मौसम विभाग ने आने वाले दिनों में प्रदेश के कुछ हिस्सों में बारिश की संभावना जताई है। यदि मानसून सक्रिय रहा तो कम बारिश वाले जिलों में भी बारिश का आंकड़ा सुधर सकता है।

फिलहाल मध्य प्रदेश में मानसून की कुल स्थिति सामान्य से थोड़ी बेहतर बनी हुई है, लेकिन क्षेत्रीय असमानता के कारण कई जिलों में अभी भी अच्छी बारिश की जरूरत महसूस की जा रही है। किसानों और प्रशासन दोनों की निगाहें अब आने वाले दिनों में होने वाली बारिश पर टिकी हुई हैं।