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5 साल में सबसे कम बारिश, आधा MP सूखे की चपेट में; 25 जिलों में ही सामान्य बरसात, गेहूं-सोयाबीन की पैदावार घटने की आशंका

 

मध्य प्रदेश में इस साल मानसून की बेरुखी ने किसानों की चिंता बढ़ा दी है। प्रदेश में पिछले पांच साल की तुलना में इस बार बारिश का आंकड़ा सबसे कम रहने की स्थिति बन गई है। कई जिलों में सामान्य से काफी कम बारिश दर्ज की गई है, जिससे खरीफ के बाद अब रबी सीजन की फसलों पर भी असर पड़ने की आशंका है। प्रदेश के करीब आधे जिले कम बारिश की स्थिति से जूझ रहे हैं।

मौसम विभाग के आंकड़ों के अनुसार प्रदेश के 25 जिलों में ही बारिश सामान्य के आसपास रही है, जबकि कई जिलों में बारिश सामान्य से 20 प्रतिशत या उससे भी अधिक कम दर्ज की गई। 11 जिलों में बारिश 80 प्रतिशत से नीचे रहने की बात सामने आई है। ऐसे में किसानों के सामने खेतों में नमी बनाए रखने और रबी फसलों की सिंचाई की चुनौती बढ़ गई है।

कई जिलों में सामान्य से काफी कम बारिश

मानसून के दौरान पर्याप्त बारिश नहीं होने का सबसे बड़ा असर उन क्षेत्रों में दिखाई दे रहा है, जहां खेती मुख्य रूप से वर्षा पर निर्भर है। बारिश की कमी के कारण जलाशयों, तालाबों और छोटे बांधों में भी पानी की उपलब्धता प्रभावित हो सकती है। इसका सीधा असर आने वाले महीनों में सिंचाई व्यवस्था पर पड़ने की संभावना है।

बारिश की कमी का असर भूजल स्तर पर भी पड़ सकता है। किसान रबी सीजन में सिंचाई के लिए ट्यूबवेल और कुओं पर निर्भर रहते हैं। यदि जलस्तर नीचे जाता है तो सिंचाई की लागत बढ़ सकती है।

गेहूं और सोयाबीन पर असर की चिंता

मध्य प्रदेश में सोयाबीन खरीफ की प्रमुख फसलों में शामिल है, जबकि गेहूं रबी सीजन की प्रमुख फसल है। कम बारिश और खेतों में पर्याप्त नमी नहीं होने का असर दोनों फसलों की उत्पादकता पर पड़ सकता है।

सोयाबीन की फसल के लिए मानसून की बारिश महत्वपूर्ण होती है। बारिश कम होने से कई इलाकों में फसल की वृद्धि और उत्पादन प्रभावित होने की आशंका रहती है। वहीं गेहूं की बुवाई के समय मिट्टी में पर्याप्त नमी नहीं मिली तो किसानों को अतिरिक्त सिंचाई करनी पड़ सकती है।

किसानों की बढ़ सकती है लागत

कम बारिश की स्थिति में किसान फसलों को बचाने के लिए सिंचाई पर अधिक खर्च कर सकते हैं। जिन किसानों के पास सिंचाई के साधन उपलब्ध नहीं हैं, उनके लिए स्थिति और चुनौतीपूर्ण हो सकती है।

कृषि विशेषज्ञों के अनुसार रबी सीजन में बुवाई का क्षेत्र और फसल का चुनाव स्थानीय पानी की उपलब्धता के आधार पर प्रभावित हो सकता है। किसान कम पानी में तैयार होने वाली फसलों की ओर भी रुख कर सकते हैं।

जलस्रोतों पर भी असर

मानसून के दौरान कम बारिश का प्रभाव केवल खेती तक सीमित नहीं रहता। नदियों, तालाबों, बांधों और जलाशयों में पानी की आवक कम होने से पेयजल और सिंचाई दोनों पर असर पड़ सकता है। ग्रामीण क्षेत्रों में आने वाले महीनों में पानी की उपलब्धता बनाए रखना प्रशासन के लिए चुनौती बन सकता है।

फिलहाल किसानों की नजर मौसम के अगले दौर पर टिकी है। यदि आने वाले समय में पर्याप्त बारिश होती है तो मिट्टी में नमी की स्थिति कुछ बेहतर हो सकती है। लेकिन बारिश की कमी बनी रही तो रबी फसलों की लागत और उत्पादन दोनों पर इसका असर दिखाई देने की आशंका है।