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मध्यप्रदेश में 1,134 करोड़ की सरकारी खरीदी पर लोकायुक्त की नजर, GeM पोर्टल से खरीद में गड़बड़ी की जांच शुरू

 

मध्यप्रदेश के नगरीय निकायों में गवर्नमेंट ई-मार्केटप्लेस (GeM) पोर्टल के जरिए की गई सरकारी खरीदी में कथित वित्तीय अनियमितताओं का मामला अब लोकायुक्त संगठन तक पहुंच गया है। लोकायुक्त संगठन ने मामले में स्वतः संज्ञान लेते हुए जांच शुरू कर दी है। आरोप है कि वर्ष 2023 से 2026 के बीच नगरीय निकायों ने कई वस्तुएं बाजार दरों की तुलना में कई गुना अधिक कीमत पर खरीदीं। लोकायुक्त के स्पेशल पुलिस एस्टेब्लिशमेंट के महानिदेशक योगेश देशमुख ने बताया कि मामले की जांच की जा रही है और संबंधित विभाग से रिपोर्ट मांगी जाएगी।

तीन साल में 1,134 करोड़ रुपये की खरीदी

प्रारंभिक आंकड़ों के मुताबिक, मध्यप्रदेश के 374 नगरीय निकायों ने पिछले तीन वर्षों में GeM पोर्टल के माध्यम से करीब 1,134 करोड़ रुपये की सामग्री खरीदी। खरीद के आंकड़ों के विश्लेषण में एक जैसी या मिलती-जुलती वस्तुओं की कीमतों में बड़ा अंतर सामने आया है।

विभागीय प्रस्तुतीकरण में अनुमान लगाया गया कि यदि सामान औसत दरों पर खरीदा जाता, तो करीब 200 से 250 करोड़ रुपये तक की बचत हो सकती थी। हालांकि, यह संभावित बचत का अनुमान है। वास्तविक वित्तीय नुकसान और किसी भी अनियमितता की पुष्टि जांच तथा संबंधित दस्तावेजों की पड़ताल के बाद ही हो सकेगी।

306 रुपये की LED लाइट 11,800 रुपये में खरीदने का मामला

खरीद प्रक्रिया में कीमतों के अंतर को लेकर कई उदाहरण सामने आए हैं। रिपोर्टों के मुताबिक, एक नगरीय निकाय में 60 वॉट की एलईडी लाइट करीब 306 रुपये में खरीदी गई, जबकि भोपाल में इसी तरह की लाइट की कीमत 11,800 रुपये दर्ज की गई।

इसी तरह, एक जगह फिनाइल जैसे सफाई रसायन की कीमत पांच रुपये प्रति लीटर बताई गई, जबकि दूसरे निकाय में मिलते-जुलते उत्पाद के लिए 33,500 रुपये की दर सामने आई। इन कीमतों में अंतर के पीछे उत्पाद की गुणवत्ता, तकनीकी विशेषताओं, मात्रा और अन्य खर्चों की भूमिका की जांच जरूरी है।कचरा वाहनों की खरीद भी सवालों के घेरे में है। एक निकाय में वाहन करीब दो लाख रुपये में खरीदा गया, जबकि दूसरे स्थान पर चार अतिरिक्त डस्टबिन सहित इसी तरह के वाहन की कीमत छह लाख रुपये बताई गई। इन उदाहरणों के आधार पर खरीद प्रक्रिया और भुगतान से जुड़े रिकॉर्ड की जांच की जा रही है।

लोकायुक्त खंगालेगा खरीद और भुगतान के दस्तावेज

लोकायुक्त जांच में खरीद आदेश, बिल, भुगतान रिकॉर्ड, सप्लायरों के विवरण और संबंधित अधिकारियों की भूमिका की पड़ताल अहम होगी। जांच का उद्देश्य यह पता लगाना है कि कीमतों में अंतर के पीछे वैध कारण थे या खरीद प्रक्रिया में नियमों की अनदेखी हुई।विभागीय स्तर पर भी इस मामले को गंभीरता से लिया गया है। नगरीय विकास एवं आवास विभाग की राज्यमंत्री प्रतिमा बागरी ने पहले ही उच्चस्तरीय जांच कराने और अनियमितता साबित होने पर जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई की बात कही थी।

अधिकारियों और सप्लायरों पर भी कार्रवाई

मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, सरकारी खरीद में कथित वित्तीय अनियमितताओं के मामले में प्रदेश में 392 अधिकारियों और कर्मचारियों के खिलाफ कार्रवाई की गई है। इनमें 135 मुख्य नगरपालिका अधिकारी भी शामिल बताए गए हैं। रिपोर्टों में सात अधिकारियों को सेवा से हटाने और ठेकेदारों तथा सप्लायरों के खिलाफ कार्रवाई की जानकारी भी दी गई है।

अब लोकायुक्त की जांच से यह स्पष्ट होने की उम्मीद है कि GeM पोर्टल के माध्यम से हुई खरीद में कहां-कहां नियमों का उल्लंघन हुआ और इसके लिए कौन जिम्मेदार है। फिलहाल कीमतों में सामने आए अंतर को लेकर जांच जारी है और अंतिम निष्कर्ष जांच पूरी होने के बाद ही सामने आएगा।