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LIG-नवलखा एलिवेटेड कॉरिडोर पर सवा घंटे बहस: 24 मीटर रोटरी और 350 करोड़ की लागत पर सवाल, मामले में अंतिम सुनवाई पूरी

 

इंदौर के LIG-नवलखा एलिवेटेड कॉरिडोर से जुड़े मामले में अंतिम सुनवाई पूरी हो गई है। सुनवाई के दौरान करीब सवा घंटे तक प्रस्तावित एलिवेटेड कॉरिडोर को लेकर विभिन्न पहलुओं पर बहस हुई। इस दौरान 24 मीटर की रोटरी और करीब 350 करोड़ रुपए की लागत को लेकर भी सवाल उठाए गए।

मामले की सुनवाई के दौरान संबंधित पक्षों की ओर से परियोजना की जरूरत, यातायात व्यवस्था और प्रस्तावित निर्माण से जुड़े तकनीकी पहलुओं पर अपनी दलीलें रखी गईं। अदालत ने दोनों पक्षों की बात सुनने के बाद अंतिम सुनवाई पूरी कर ली है। अब मामले में आगे के आदेश का इंतजार है।

24 मीटर रोटरी को लेकर उठे सवाल

सुनवाई के दौरान 24 मीटर की रोटरी का मुद्दा भी प्रमुखता से सामने आया। एलिवेटेड कॉरिडोर के निर्माण के साथ प्रस्तावित रोटरी की उपयोगिता और यातायात व्यवस्था पर सवाल किए गए।

बहस के दौरान यह भी चर्चा हुई कि परियोजना के निर्माण के बाद संबंधित क्षेत्र में यातायात का संचालन किस तरह होगा और मौजूदा सड़क व्यवस्था पर इसका क्या प्रभाव पड़ेगा। परियोजना से जुड़े तकनीकी और व्यावहारिक पहलुओं को लेकर भी दलीलें रखी गईं।

350 करोड़ रुपए की लागत पर भी चर्चा

एलिवेटेड कॉरिडोर परियोजना की अनुमानित लागत करीब 350 करोड़ रुपए बताई जा रही है। सुनवाई में परियोजना की इतनी बड़ी लागत और इसके उपयोग से जुड़े पहलुओं पर भी सवाल उठाए गए।

परियोजना के समर्थक पक्ष की ओर से इसके उद्देश्य और यातायात सुधार से जुड़े तर्क रखे गए, जबकि विरोध से जुड़े पक्ष की ओर से लागत और डिजाइन सहित विभिन्न बिंदुओं पर सवाल उठाए गए।

सवा घंटे चली अंतिम सुनवाई

मामले में करीब सवा घंटे तक सुनवाई चली। इस दौरान दोनों पक्षों की दलीलों को सुना गया। अंतिम सुनवाई पूरी होने के बाद अब अदालत के आदेश पर सभी की नजर है।

एलआईजी से नवलखा क्षेत्र के बीच प्रस्तावित एलिवेटेड कॉरिडोर को लेकर लंबे समय से चर्चा चल रही है। परियोजना का उद्देश्य क्षेत्र में यातायात व्यवस्था को बेहतर करना और प्रमुख मार्ग पर वाहनों के दबाव को कम करना बताया गया है।

अब अंतिम सुनवाई पूरी होने के बाद अदालत के फैसले से परियोजना की आगे की दिशा स्पष्ट होगी। फिलहाल निर्माण को लेकर अंतिम स्थिति अदालत के आदेश के बाद ही सामने आएगी।