बारिश की कमी से बढ़ी बिजली की खपत, जुलाई में शहर की पीक डिमांड 17% उछलकर 480 मेगावाट पहुंची
बिजली विभाग के आंकड़ों के अनुसार, पिछले साल की तुलना में इस बार जुलाई के मध्य तक शहर की अधिकतम बिजली मांग में करीब 17 प्रतिशत की वृद्धि हुई है। पिछले वर्ष जहां जुलाई के मध्य तक अधिकतम बिजली मांग 410 मेगावाट थी, वहीं इस साल यह बढ़कर 480 मेगावाट तक पहुंच गई है। बिजली की मांग में यह बढ़ोतरी विभाग के लिए भी चुनौती बन गई है।
उमस और गर्मी ने बढ़ाई बिजली की खपत
मौसम विशेषज्ञों का कहना है कि सामान्य से कम बारिश होने के कारण तापमान में अपेक्षित गिरावट नहीं आई। इसके साथ ही वातावरण में नमी बढ़ने से उमस अधिक महसूस हुई। ऐसे मौसम में लोग लंबे समय तक एयर कंडीशनर, कूलर और अन्य विद्युत उपकरणों का उपयोग कर रहे हैं, जिससे बिजली की खपत लगातार बढ़ रही है।
बिजली विभाग पर बढ़ा दबाव
बढ़ती मांग को देखते हुए बिजली विभाग को निर्बाध आपूर्ति बनाए रखने के लिए अतिरिक्त सतर्कता बरतनी पड़ रही है। ट्रांसफार्मर और फीडरों पर बढ़ते लोड की लगातार निगरानी की जा रही है ताकि ओवरलोडिंग की स्थिति से बचा जा सके। विभाग का कहना है कि फिलहाल बिजली आपूर्ति सामान्य है, लेकिन यदि आने वाले दिनों में बारिश नहीं होती और गर्मी का असर बना रहता है तो बिजली की मांग में और इजाफा हो सकता है।
बारिश की कमी का दिख रहा असर
जुलाई को आमतौर पर मानसून का सबसे सक्रिय महीना माना जाता है, लेकिन इस बार सामान्य से करीब तीन इंच कम बारिश दर्ज होने से मौसम अपेक्षाकृत गर्म बना रहा। इसका सीधा असर न केवल बिजली की खपत पर पड़ा है, बल्कि जल स्तर, कृषि और दैनिक जनजीवन पर भी दिखाई देने लगा है।
आगे भी बढ़ सकती है बिजली की मांग
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि मानसून जल्द सक्रिय नहीं हुआ तो अगले कुछ दिनों में बिजली की अधिकतम मांग नए स्तर पर पहुंच सकती है। ऐसे में बिजली विभाग के सामने निर्बाध आपूर्ति बनाए रखना बड़ी चुनौती होगी। वहीं, विभाग ने उपभोक्ताओं से भी आवश्यकता के अनुसार ही बिजली का उपयोग करने और ऊर्जा संरक्षण अपनाने की अपील की है।