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मध्य प्रदेश के 36 जिलों में बारिश की कमी, अल नीनो का असर; आधे एमपी में सामान्य से कम बारिश

 

मध्य प्रदेश में मानसून अब विदाई की ओर है, लेकिन प्रदेश के कई जिलों में बारिश का आंकड़ा अभी भी सामान्य से नीचे बना हुआ है। 19 सितंबर तक प्रदेश के 37 जिलों में सामान्य से कम बारिश दर्ज की गई थी। वहीं पूरे प्रदेश में मानसूनी बारिश सामान्य कोटे की करीब 89.3 फीसदी ही हो पाई थी।

पश्चिमी मध्य प्रदेश में बारिश की कमी ज्यादा

मौसम के आंकड़ों के मुताबिक पश्चिमी मध्य प्रदेश में बारिश की कमी पूर्वी हिस्से की तुलना में अधिक रही। 15 सितंबर तक पश्चिमी मध्य प्रदेश में सामान्य से करीब 11 फीसदी कम बारिश दर्ज हुई थी। आलीराजपुर में सामान्य से 49 फीसदी कम बारिश हुई, जबकि धार और नर्मदापुरम में 35-35 फीसदी की कमी रही। झाबुआ में भी सामान्य से 32 फीसदी कम पानी बरसा।

इसके उलट प्रदेश के कुछ जिलों में सामान्य से काफी ज्यादा बारिश हुई। निवाड़ी और मऊगंज में सामान्य से 50 फीसदी से अधिक बारिश दर्ज की गई। सतना और सिंगरौली में भी बारिश सामान्य से ज्यादा रही।

अल नीनो ने प्रभावित किया मानसून

इस साल मानसून पर अल नीनो का असर भी देखने को मिला। केंद्र सरकार के अनुसार 2026 के दौरान भूमध्यरेखीय प्रशांत क्षेत्र में कमजोर अल नीनो जून में विकसित हुआ और बाद में मध्यम स्तर तक मजबूत हुआ। इसे देश में मानसूनी परिसंचरण को कमजोर करने वाले प्रमुख जलवायु कारकों में शामिल किया गया है।

आईएमडी ने मानसून 2026 के लिए देशभर में सामान्य से कम बारिश का अनुमान जताया था। दूसरे चरण के पूर्वानुमान में पूरे देश के लिए मौसमी बारिश दीर्घकालिक औसत की करीब 90 फीसदी रहने का अनुमान था।

कई जिलों में खेती और जलस्रोतों पर असर

बारिश में क्षेत्रीय असमानता का असर खेती और जल उपलब्धता पर पड़ सकता है। जिन इलाकों में लंबे समय तक बारिश सामान्य से कम रही है, वहां मिट्टी की नमी, खरीफ फसलों और जलाशयों पर दबाव बढ़ सकता है। केंद्र सरकार ने भी कम बारिश के संभावित प्रभावों में कृषि, जल उपलब्धता और जलाशयों पर दबाव को प्रमुख चिंता बताया है।

हालांकि मानसून के अंतिम दौर में होने वाली बारिश से कुछ जिलों की कमी कम हो सकती है। लेकिन जिन क्षेत्रों में अब तक बड़ा अंतर बना हुआ है, वहां सामान्य मानसूनी आंकड़ा पूरा करना चुनौतीपूर्ण रहेगा।