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कूनो के चीतों का बढ़ा कुनबा, MP-राजस्थान के 12 जिलों तक पहुंची मौजूदगी: शिकार के तरीके में बदलाव, 50% पालतू पशु बने निशाना

 

मध्य प्रदेश के कूनो राष्ट्रीय उद्यान से छोड़े गए चीतों की गतिविधियां अब लगातार नए इलाकों तक पहुंच रही हैं। ताजा आंकड़ों के मुताबिक, चीतों की मौजूदगी अब मध्य प्रदेश और राजस्थान के 12 जिलों तक दर्ज की जा चुकी है। वहीं, विशेषज्ञों का कहना है कि चीतों के शिकार के व्यवहार में भी बदलाव देखने को मिला है और उनके शिकार का करीब 50 फीसदी हिस्सा पालतू पशु बन रहे हैं।

12 जिलों तक फैला चीतों का मूवमेंट

वन विभाग की निगरानी में सामने आया है कि कूनो से निकलकर कई चीते आसपास के जंगलों और आबादी से लगे क्षेत्रों तक पहुंच रहे हैं। उनकी आवाजाही मध्य प्रदेश और राजस्थान के कुल 12 जिलों में रिकॉर्ड की गई है। जीपीएस कॉलर और मॉनिटरिंग टीमों की मदद से चीतों की गतिविधियों पर लगातार नजर रखी जा रही है।

शिकार के पैटर्न में आया बदलाव

विशेषज्ञों के अनुसार, शुरुआत में चीते मुख्य रूप से जंगली शिकार पर निर्भर थे, लेकिन अब उनके शिकार के तरीके में बदलाव देखा जा रहा है। आंकड़े बताते हैं कि करीब 50 फीसदी मामलों में चीतों ने पालतू पशुओं को अपना शिकार बनाया है। इसके पीछे जंगलों के बाहर आवाजाही, आसान शिकार की उपलब्धता और मानव बस्तियों के करीब पहुंचना प्रमुख कारण माने जा रहे हैं।

वन विभाग के सामने नई चुनौती

पालतू पशुओं पर बढ़ते हमलों ने वन विभाग की चिंता बढ़ा दी है। विभाग एक ओर चीतों की सुरक्षा और निगरानी कर रहा है, तो दूसरी ओर ग्रामीणों के पशुधन की सुरक्षा और मानव-वन्यजीव संघर्ष को कम करने की चुनौती भी सामने है। प्रभावित क्षेत्रों में लोगों को सतर्क रहने और पशुओं को खुले में न छोड़ने की सलाह दी जा रही है।

निगरानी और जागरूकता पर जोर

वन विभाग का कहना है कि चीतों की हर गतिविधि पर लगातार नजर रखी जा रही है। जिन क्षेत्रों में चीतों की मौजूदगी दर्ज की गई है, वहां निगरानी दल सक्रिय हैं। साथ ही ग्रामीणों को जागरूक करने और जरूरत पड़ने पर मुआवजा प्रक्रिया को तेज करने के प्रयास भी किए जा रहे हैं, ताकि मानव और वन्यजीवों के बीच संतुलन बनाए रखा जा सके।