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2 साल में 110 बार बेहोश किए गए कूनो के चीते, वन विभाग पर भड़के चीता मैन ऑफ इंडिया

 

मध्य प्रदेश के कूनो नेशनल पार्क में चीतों की देखरेख को लेकर एक नया विवाद सामने आया है। दावा किया गया है कि पिछले दो वर्षों में कूनो के चीतों को करीब 110 बार बेहोश किया गया। इस मुद्दे पर ‘चीता मैन ऑफ इंडिया’ के नाम से मशहूर वन्यजीव विशेषज्ञ ने वन विभाग की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठाए हैं। उन्होंने कहा कि बार-बार बेहोश करना चीतों के स्वास्थ्य और व्यवहार पर नकारात्मक असर डाल सकता है।

कूनो नेशनल पार्क में अफ्रीकी चीतों को बसाने की महत्वाकांक्षी परियोजना के तहत पिछले कुछ वर्षों में कई चीतों को भारत लाया गया था। यह परियोजना देश में दशकों बाद चीतों की वापसी के रूप में देखी गई थी। हालांकि शुरुआत से ही चीतों की मौत, स्वास्थ्य समस्याओं और निगरानी व्यवस्था को लेकर समय-समय पर सवाल उठते रहे हैं।

वन्यजीव विशेषज्ञों के अनुसार चीतों को कई कारणों से ट्रैंक्विलाइज यानी बेहोश किया जाता है। इनमें स्वास्थ्य जांच, रेडियो कॉलर बदलना, इलाज, स्थानांतरण और निगरानी जैसे कारण शामिल होते हैं। लेकिन आलोचकों का कहना है कि यदि यह प्रक्रिया जरूरत से ज्यादा की जाए तो इससे जानवरों पर गंभीर शारीरिक और मानसिक प्रभाव पड़ सकते हैं।

‘चीता मैन ऑफ इंडिया’ ने आरोप लगाया कि बार-बार बेहोश करने की प्रक्रिया चीतों के प्राकृतिक व्यवहार को प्रभावित कर सकती है। उन्होंने यह भी कहा कि वन विभाग को वैज्ञानिक और संतुलित तरीके से निगरानी करनी चाहिए ताकि जानवरों पर अनावश्यक दबाव न पड़े। उनके बयान के बाद वन्यजीव संरक्षण से जुड़े हलकों में बहस तेज हो गई है।

वहीं वन विभाग के अधिकारियों का कहना है कि चीतों की सुरक्षा और स्वास्थ्य को ध्यान में रखते हुए ही सभी प्रक्रियाएं अपनाई जाती हैं। विभाग का दावा है कि विशेषज्ञों और पशु चिकित्सकों की सलाह पर ही ट्रैंक्विलाइजेशन किया जाता है और हर कदम अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुसार उठाया जाता है।

कूनो परियोजना शुरू होने के बाद से कई चुनौतियां सामने आई हैं। कुछ चीतों की मौत ने परियोजना को लेकर चिंता बढ़ाई थी। हालांकि सरकार और वन विभाग का कहना है कि यह एक लंबी अवधि की परियोजना है और शुरुआती चुनौतियां स्वाभाविक हैं।

वन्यजीव संरक्षण से जुड़े विशेषज्ञों का मानना है कि भारत में चीता पुनर्वास परियोजना बेहद महत्वपूर्ण है, लेकिन इसके लिए लगातार वैज्ञानिक निगरानी और पारदर्शिता जरूरी है। किसी भी तरह की लापरवाही या गलत प्रबंधन परियोजना की सफलता पर असर डाल सकता है।

सोशल मीडिया पर भी यह मुद्दा तेजी से चर्चा में है। कई लोग वन विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठा रहे हैं, जबकि कुछ विशेषज्ञों का कहना है कि बड़े वन्यजीवों की निगरानी में कई बार बेहोश करने की प्रक्रिया आवश्यक हो जाती है।

फिलहाल कूनो के चीतों को लेकर विवाद और बहस जारी है। अब सभी की नजर वन विभाग की प्रतिक्रिया और आगे उठाए जाने वाले कदमों पर टिकी हुई है।