53 साल से सांपों का रेस्क्यू कर रहे कैलाशनाथ, 12 फीट के सांप से 30 मिनट तक किया मुकाबला
नाग पंचमी के मौके पर इंदौर में सांपों के रेस्क्यू के लिए विशेष टीमें तैनात की गई हैं। इस बीच शहर में लंबे समय से सांपों को सुरक्षित रेस्क्यू कर जंगल या सुरक्षित स्थानों पर छोड़ने वाले कैलाशनाथ की कहानी भी चर्चा में है। कैलाशनाथ पिछले 53 वर्षों से सांपों का रेस्क्यू कर रहे हैं और अब तक हजारों सांपों को सुरक्षित बचा चुके हैं।
कैलाशनाथ ने सांपों के रेस्क्यू का काम तब शुरू किया था, जब इस क्षेत्र में आधुनिक संसाधन और प्रशिक्षित रेस्क्यू टीमों की व्यवस्था नहीं थी। अनुभव के आधार पर उन्होंने सांपों को पकड़ने और उन्हें सुरक्षित स्थान पर छोड़ने का तरीका सीखा। वर्षों के अनुभव के कारण अब किसी भी इलाके से सांप निकलने की सूचना मिलने पर लोग उनकी मदद लेते हैं।
उनके रेस्क्यू करियर में कई ऐसे मौके आए, जब उन्हें बेहद खतरनाक परिस्थितियों का सामना करना पड़ा। एक बार करीब 12 फीट लंबे सांप के रेस्क्यू के दौरान उन्हें लगभग 30 मिनट तक मशक्कत करनी पड़ी। सांप लगातार खुद को छुड़ाने की कोशिश कर रहा था, जबकि कैलाशनाथ धैर्य के साथ उसे नियंत्रित करने में जुटे रहे। काफी प्रयास के बाद सांप को सुरक्षित पकड़ लिया गया।
कैलाशनाथ का कहना है कि सांपों को मारना किसी समस्या का समाधान नहीं है। वे लोगों से अपील करते हैं कि घर या आसपास सांप दिखाई देने पर घबराने के बजाय प्रशिक्षित रेस्क्यू टीम को सूचना दें। सांप को छेड़ने या खुद पकड़ने की कोशिश करने से इंसान और सांप दोनों के लिए खतरा बढ़ सकता है।
नाग पंचमी के दौरान सांपों से जुड़े धार्मिक आयोजनों और लोगों की आवाजाही बढ़ने के कारण रेस्क्यू टीमों पर भी अतिरिक्त जिम्मेदारी रहती है। इंदौर में ऐसे स्थानों पर विशेष नजर रखी जा रही है, जहां सांप निकलने की संभावना अधिक रहती है। लोगों को भी सावधानी बरतने की सलाह दी जा रही है।
कैलाशनाथ के 53 साल के अनुभव ने उन्हें शहर में सांपों के रेस्क्यू के लिए अलग पहचान दिलाई है। उनका उद्देश्य सांपों को नुकसान पहुंचाए बिना सुरक्षित तरीके से रेस्क्यू करना है। वे लोगों को वन्यजीवों के प्रति संवेदनशील रहने का संदेश भी देते हैं।
नाग पंचमी के अवसर पर इंदौर में रेस्क्यू टीमें तैनात रहने के बीच कैलाशनाथ जैसे अनुभवी रेस्क्यूकर्मियों की भूमिका अहम हो जाती है। वर्षों से सांपों को बचाने का उनका अभियान यह संदेश देता है कि इंसानों और वन्यजीवों के बीच संतुलन बनाकर सांपों की जान भी बचाई जा सकती है और लोगों की सुरक्षा भी सुनिश्चित की जा सकती है।