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मॉब लिंचिंग केस में फैसला सुनाने वाली जज को मिली जान से मारने की धमकी, वायरल वीडियो के बाद पुलिस और साइबर सेल एक्शन में

 

मध्य प्रदेश के नर्मदापुरम जिले में मॉब लिंचिंग मामले में 14 दोषियों को उम्रकैद की सजा सुनाने वाली जिला न्यायाधीश तबस्सुम खान को सोशल मीडिया के जरिए जान से मारने की धमकी मिलने का मामला सामने आया है। धमकी भरे वीडियो वायरल होने के बाद गृह मंत्रालय की साइबर सेल और स्थानीय पुलिस हरकत में आ गई है। पुलिस ने दो अज्ञात लोगों के खिलाफ मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।

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मध्य प्रदेश में न्यायपालिका की सुरक्षा को लेकर एक गंभीर मामला सामने आया है। नर्मदापुरम में चर्चित मॉब लिंचिंग केस में 14 दोषियों को आजीवन कारावास की सजा सुनाने वाली मुस्लिम महिला जज तबस्सुम खान को सोशल मीडिया पर खुलेआम जान से मारने की धमकी दी गई है। धमकी से जुड़े दो वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे हैं, जिनमें एक युवक और एक महिला जज के खिलाफ आपत्तिजनक और धमकी भरी बातें करते दिखाई दे रहे हैं।

वायरल वीडियो में एक युवक कथित तौर पर कहता है कि यदि 10 दिनों के भीतर "हमारे सभी हिंदू भाई" रिहा नहीं किए गए तो देश और प्रदेश में हिंसा होगी। वहीं दूसरे वीडियो में एक महिला न्यायाधीश के खिलाफ आपत्तिजनक टिप्पणी करते हुए उन्हें धमकाती नजर आ रही है। वीडियो में महिला फैसले को लेकर नाराजगी जताते हुए व्यक्तिगत और सांप्रदायिक टिप्पणी भी करती है।

इन वीडियो के सामने आने के बाद मामला गंभीर हो गया। न्यायपालिका से जुड़े अधिकारियों ने इसे न्यायिक स्वतंत्रता और कानून-व्यवस्था से जुड़ा संवेदनशील विषय माना है। गृह मंत्रालय की साइबर सेल ने वायरल वीडियो का संज्ञान लेते हुए सूचना प्रौद्योगिकी (आईटी) अधिनियम के तहत नोटिस जारी किया है और संबंधित सोशल मीडिया गतिविधियों की जांच शुरू कर दी है।

वहीं, सिवनी मालवा पुलिस ने भी मामले में त्वरित कार्रवाई करते हुए दो अज्ञात लोगों के खिलाफ विभिन्न धाराओं में मामला दर्ज किया है। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि वीडियो बनाने और प्रसारित करने वाले लोगों की पहचान की जा रही है। डिजिटल साक्ष्यों के आधार पर आरोपियों तक पहुंचने का प्रयास किया जा रहा है।

गौरतलब है कि हाल ही में नर्मदापुरम के बहुचर्चित मॉब लिंचिंग मामले में अदालत ने 14 आरोपियों को दोषी ठहराते हुए उम्रकैद की सजा सुनाई थी। इस फैसले के बाद सोशल मीडिया पर पक्ष और विपक्ष में प्रतिक्रियाएं सामने आई थीं। हालांकि, कानून विशेषज्ञों का कहना है कि किसी भी न्यायिक फैसले से असहमति होने पर कानूनी प्रक्रिया के तहत उच्च अदालत में अपील की जा सकती है, लेकिन न्यायाधीशों को धमकी देना गंभीर अपराध है।

पुलिस का कहना है कि मामले की हर पहलू से जांच की जा रही है। यदि जांच में किसी व्यक्ति की संलिप्तता सामने आती है तो उसके खिलाफ कानून के अनुसार सख्त कार्रवाई की जाएगी। साथ ही यह भी देखा जा रहा है कि वायरल वीडियो के पीछे कोई संगठित नेटवर्क या उकसावे की भूमिका तो नहीं है।

फिलहाल पुलिस और साइबर एजेंसियां वीडियो की सत्यता, आरोपियों की पहचान और सोशल मीडिया पर उसके प्रसार की जांच में जुटी हैं। प्रशासन ने लोगों से अपील की है कि वे किसी भी भड़काऊ या आपत्तिजनक सामग्री को साझा करने से बचें और कानून-व्यवस्था बनाए रखने में सहयोग करें।