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जबलपुर बरगी बांध लबालब, 9 गेट खोले गए: नर्मदा घाटों पर अलर्ट, 1031 क्यूमेक पानी छोड़ा जा रहा

 

मध्य प्रदेश के जबलपुर में स्थित बरगी बांध में जलस्तर बढ़ने के बाद इसके 9 गेट खोल दिए गए हैं। मंडला और डिंडौरी के कैचमेंट क्षेत्रों में लगातार हो रही बारिश के कारण बांध में पानी की आवक बढ़ गई है। जलस्तर नियंत्रित करने के लिए बांध प्रबंधन ने पानी छोड़ने का फैसला लिया है। वर्तमान में 9 गेटों से करीब 1031 क्यूमेक पानी नर्मदा नदी में छोड़ा जा रहा है।

बरगी बांध का जलस्तर 422.76 मीटर तक पहुंच गया है। बांध के भरने के बाद प्रशासन और जल संसाधन विभाग ने नर्मदा नदी के घाटों और तटीय क्षेत्रों में अलर्ट जारी किया है। लोगों से अपील की गई है कि वे नदी के किनारे जाने से बचें और प्रशासन के निर्देशों का पालन करें।

बताया जा रहा है कि मंडला और डिंडौरी क्षेत्र में हो रही तेज बारिश का पानी बरगी बांध तक पहुंच रहा है। लगातार बढ़ती आवक के चलते बांध में जलस्तर तेजी से ऊपर आया। बांध प्रबंधन ने सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए गेट खोलकर पानी की निकासी शुरू की है। अधिकारियों के अनुसार, पानी की आवक और मौसम की स्थिति के आधार पर डिस्चार्ज की मात्रा को आगे बढ़ाया या घटाया जा सकता है।

बरगी बांध से पानी छोड़े जाने के बाद नर्मदा नदी के घाटों पर जलस्तर बढ़ने की संभावना है। प्रशासन के अनुसार, ग्वारीघाट, तिलवाराघाट, लमहेटाघाट और भेड़ाघाट सहित कई इलाकों में विशेष निगरानी रखी जा रही है। घाटों पर सुरक्षा कर्मियों को तैनात किया गया है और श्रद्धालुओं व स्थानीय लोगों को नदी से दूरी बनाए रखने की सलाह दी गई है।

बरगी बांध नर्मदा नदी पर बना मध्य प्रदेश का प्रमुख जल प्रोजेक्ट है। इसका उपयोग सिंचाई, जल आपूर्ति और बिजली उत्पादन के लिए किया जाता है। मानसून के दौरान कैचमेंट क्षेत्र में अच्छी बारिश होने पर बांध में पानी की आवक बढ़ जाती है, जिसके बाद जलस्तर नियंत्रित रखने के लिए गेट खोले जाते हैं।

प्रशासन लगातार बांध की स्थिति पर नजर बनाए हुए है। नर्मदा नदी के किनारे बसे गांवों और निचले इलाकों में भी सतर्कता बढ़ाई गई है। अधिकारियों ने लोगों से अफवाहों पर ध्यान नहीं देने और किसी भी आपात स्थिति में प्रशासन से संपर्क करने की अपील की है।

फिलहाल बरगी बांध के गेट खुलने के बाद नर्मदा घाटों पर पानी बढ़ने की संभावना को देखते हुए सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी गई है। मौसम विभाग के पूर्वानुमान और बांध में पानी की आवक को देखते हुए आगे का निर्णय लिया जाएगा।