MP में निजी हाथों में दिए ITI की फीस 4 साल में 10,680 से बढ़कर 1.5 लाख तक पहुंची, 100% प्लेसमेंट का वादा भी अधूरा
मध्य प्रदेश में निजी हाथों में दिए गए औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थानों यानी ITI में फीस को लेकर बड़ा अंतर सामने आया है। चार साल के दौरान कुछ संस्थानों में फीस 10,680 रुपए से बढ़कर करीब डेढ़ लाख रुपए तक पहुंच गई। इसके बावजूद विद्यार्थियों को 100 फीसदी प्लेसमेंट देने का जो वादा किया गया था, वह भी पूरी तरह पूरा नहीं हो सका। उपलब्ध जानकारी के मुताबिक प्लेसमेंट का आंकड़ा 30 फीसदी तक भी नहीं पहुंच पाया।
ITI के निजीकरण के पीछे विद्यार्थियों को आधुनिक तकनीकी ट्रेड में प्रशिक्षण देने और प्रशिक्षण के बाद रोजगार के बेहतर अवसर उपलब्ध कराने का उद्देश्य बताया गया था। लेकिन अब व्यवस्था को लेकर सवाल उठ रहे हैं। आरोप है कि जिन संस्थानों में आधुनिक ट्रेड शुरू किए जाने थे, वहां कुछ पुराने ट्रेड ही बंद कर दिए गए।
फीस में कई गुना बढ़ोतरी
निजी हाथों में जाने के बाद कुछ ITI में विद्यार्थियों पर फीस का बोझ काफी बढ़ गया है। चार साल पहले जहां फीस करीब 10,680 रुपए थी, वहीं अब कुछ संस्थानों में यह बढ़कर डेढ़ लाख रुपए तक पहुंच गई है। फीस में इस बड़े अंतर का सबसे ज्यादा असर आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के विद्यार्थियों पर पड़ रहा है।
महंगी फीस के कारण कई विद्यार्थियों और उनके परिवारों को प्रशिक्षण का खर्च उठाने के लिए कर्ज या एजुकेशन लोन का सहारा लेना पड़ रहा है। ऐसे में ITI से प्रशिक्षण लेकर रोजगार हासिल करने की उम्मीद रखने वाले विद्यार्थियों पर आर्थिक दबाव भी बढ़ गया है।
100% प्लेसमेंट का वादा, 30% भी नहीं पहुंचा आंकड़ा
निजी ITI को लेकर विद्यार्थियों को बेहतर रोजगार और 100 फीसदी प्लेसमेंट का भरोसा दिया गया था। लेकिन मौजूदा स्थिति में प्लेसमेंट का आंकड़ा 30 फीसदी तक भी नहीं पहुंचने की बात सामने आई है। इससे प्रशिक्षण की गुणवत्ता और निजी संस्थानों के दावों पर सवाल खड़े हो रहे हैं।
विद्यार्थियों के लिए ITI का सबसे बड़ा उद्देश्य प्रशिक्षण के बाद रोजगार हासिल करना होता है। ऐसे में यदि फीस लगातार बढ़ रही है और उसके अनुपात में रोजगार के अवसर नहीं मिल रहे हैं, तो आर्थिक रूप से कमजोर विद्यार्थियों के सामने मुश्किलें बढ़ना स्वाभाविक है।
आधुनिक ट्रेड की जगह पुराने ट्रेड बंद
निजीकरण के समय आधुनिक जरूरतों के अनुरूप नए ट्रेड शुरू करने की बात कही गई थी। हालांकि आरोप है कि इसके उलट कुछ पुराने ट्रेड बंद कर दिए गए। इससे विद्यार्थियों को बदलती तकनीक और उद्योगों की मांग के अनुरूप प्रशिक्षण मिलने के उद्देश्य पर भी सवाल उठ रहे हैं।
अब जरूरत इस बात की है कि निजी ITI में फीस बढ़ोतरी, ट्रेडों की स्थिति और प्लेसमेंट के दावों की समीक्षा की जाए। साथ ही विद्यार्थियों से ली जा रही फीस और उन्हें उपलब्ध कराए जा रहे प्रशिक्षण व रोजगार के अवसरों के बीच तालमेल की भी जांच हो, ताकि कमजोर वर्ग के विद्यार्थियों पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ न पड़े।