7 साल की बच्ची के अपहरण और हत्या के दोषी की फांसी बदली: इंदौर हाईकोर्ट ने उम्रकैद में किया तब्दील, दोषसिद्धि बरकरार
मध्य प्रदेश हाईकोर्ट की इंदौर बेंच ने वर्ष 2022 के चर्चित 7 वर्षीय बच्ची के अपहरण और हत्या के मामले में बड़ा फैसला सुनाया है। अदालत ने मामले के आरोपी सद्दाम उर्फ वाहिद की फांसी की सजा को बदल दिया है। हालांकि, कोर्ट ने आरोपी की हत्या, अपहरण और पॉक्सो एक्ट के तहत हुई दोषसिद्धि को बरकरार रखा है।जस्टिस सुबोध अभ्यंकर और न्यायमूर्ति आलोक अवस्थी की खंडपीठ ने मामले की सुनवाई करते हुए आरोपी को बिना किसी रिमिशन के आजीवन कारावास की सजा सुनाई। यानी आरोपी को सामान्य तौर पर मिलने वाली सजा में कमी या समय से पहले रिहाई का लाभ नहीं मिलेगा।
2022 में सामने आया था मामला
यह मामला वर्ष 2022 में सामने आया था, जब 7 वर्षीय बच्ची के अपहरण के बाद उसकी हत्या कर दी गई थी। घटना ने पूरे क्षेत्र में सनसनी फैला दी थी। पुलिस ने मामले की जांच करते हुए सद्दाम उर्फ वाहिद को आरोपी बनाया था।जांच के बाद पुलिस ने आरोपी के खिलाफ संबंधित धाराओं में मामला दर्ज कर न्यायालय में आरोप पत्र पेश किया। निचली अदालत ने मामले की सुनवाई के बाद आरोपी को दोषी ठहराते हुए फांसी की सजा सुनाई थी।
हाईकोर्ट में चुनौती दी गई थी सजा
निचली अदालत के फैसले के खिलाफ आरोपी की ओर से हाईकोर्ट में अपील की गई थी। मामले की सुनवाई के दौरान अदालत के सामने अभियोजन और बचाव पक्ष की दलीलें रखी गईं।हाईकोर्ट की खंडपीठ ने मामले के उपलब्ध साक्ष्यों और रिकॉर्ड का परीक्षण करने के बाद आरोपी की दोषसिद्धि को बरकरार रखा। अदालत ने हत्या, अपहरण और पॉक्सो एक्ट के तहत आरोपी को दोषी माना।हालांकि, फांसी की सजा को बदलते हुए उसे बिना किसी रिमिशन के आजीवन कारावास में तब्दील कर दिया गया।
दोषसिद्धि बरकरार, सजा में बदलाव
हाईकोर्ट के फैसले का महत्वपूर्ण पहलू यह है कि अदालत ने आरोपी को अपराधों से बरी नहीं किया है। उसकी दोषसिद्धि कायम है, लेकिन मृत्युदंड के स्थान पर आजीवन कारावास की सजा दी गई है।अदालत के आदेश के अनुसार, आरोपी को बिना किसी रिमिशन के जेल में रहना होगा। इससे सामान्य सजा में छूट या समय से पहले रिहाई की संभावना सीमित हो जाती है।
पॉक्सो के तहत भी दोषी
चूंकि पीड़िता नाबालिग थी, इसलिए मामले में पॉक्सो एक्ट के प्रावधान भी लगाए गए थे। हाईकोर्ट ने इस मामले में आरोपी की पॉक्सो एक्ट के तहत दोषसिद्धि को भी बरकरार रखा है।फैसले के बाद अब आरोपी को फांसी की जगह आजीवन कारावास की सजा भुगतनी होगी। हाईकोर्ट का यह निर्णय नाबालिगों के खिलाफ गंभीर अपराधों से जुड़े मामलों में महत्वपूर्ण माना जा रहा है।