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अंगदान जागरूकता में इंदौर बना मिसाल, मृत्यु के बाद नेत्रदान से मिल रही नई रोशनी

 

किसी व्यक्ति की मृत्यु के बाद उसकी आंखें किसी और के जीवन में रोशनी बन सकती हैं—इसी मानवीय सोच को जन-आंदोलन का रूप देने में Indore ने पूरे मध्य प्रदेश में एक नई मिसाल कायम की है।

शहर में नेत्रदान (आंखों का दान) को लेकर लगातार जागरूकता अभियान चलाए जा रहे हैं, जिससे लोग मृत्यु के बाद अपनी आंखें दान करने के लिए आगे आ रहे हैं। इन प्रयासों का असर यह है कि अब बड़ी संख्या में परिवार दुख की घड़ी में भी किसी और को दृष्टि देने का निर्णय ले रहे हैं।

विशेषज्ञों के अनुसार, नेत्रदान ऐसा दान है जिससे दो लोगों को नई रोशनी मिल सकती है। इस प्रक्रिया में दान की गई आंखों के कॉर्निया का उपयोग उन लोगों के लिए किया जाता है जो दृष्टिहीनता का शिकार हैं। चिकित्सा जगत में इसे सबसे मानवीय और प्रभावी दानों में से एक माना जाता है।

Madhya Pradesh में इंदौर की इस पहल ने सामाजिक सोच को बदलने में अहम भूमिका निभाई है। पहले जहां नेत्रदान को लेकर संकोच और जागरूकता की कमी थी, वहीं अब यह एक सामाजिक जिम्मेदारी के रूप में देखा जाने लगा है।

अभियानों के जरिए लोगों को यह समझाया जा रहा है कि मृत्यु के बाद भी किसी की जिंदगी को रोशन किया जा सकता है। इसी सोच के चलते कई परिवार स्वेच्छा से आगे आकर नेत्रदान के लिए सहमति दे रहे हैं।

स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि यदि समाज में इस तरह की जागरूकता और बढ़े तो दृष्टिहीनता से जूझ रहे हजारों लोगों को नई जिंदगी मिल सकती है। इंदौर की यह पहल अब अन्य शहरों के लिए भी प्रेरणा बन रही है।

कुल मिलाकर, इंदौर ने यह साबित किया है कि एक छोटा सा निर्णय भी किसी के जीवन में बड़ा बदलाव ला सकता है और मानवता को एक नई दिशा दे सकता है।