इंदौर भागीरथपुरा दूषित पानी कांड: न्यायिक जांच रिपोर्ट में खुलासा, पीने योग्य नहीं था सप्लाई किया गया पानी
मध्य प्रदेश के इंदौर के भागीरथपुरा इलाके में दूषित पानी पीने से हुई 36 लोगों की मौत के मामले में न्यायिक जांच रिपोर्ट में सिस्टम की गंभीर लापरवाहियां सामने आई हैं। हाईकोर्ट के रिटायर्ड जस्टिस सुशील गुप्ता की अध्यक्षता वाले जांच आयोग ने अपनी रिपोर्ट में माना है कि क्षेत्र के लोगों को ऐसा पानी सप्लाई किया जा रहा था, जो मानव उपभोग यानी पीने योग्य नहीं था।
रिपोर्ट के अनुसार, भागीरथपुरा क्षेत्र में जल आपूर्ति व्यवस्था की निगरानी और गुणवत्ता जांच में कई स्तरों पर खामियां सामने आईं। आयोग ने माना कि दूषित पानी की समस्या समय रहते पहचान ली जाती और प्रभावी कदम उठाए जाते तो इतनी बड़ी त्रासदी को टाला जा सकता था।
जांच में यह भी सामने आया कि पानी की गुणवत्ता को लेकर जिम्मेदार विभागों के बीच समन्वय की कमी रही। नियमित जांच, पाइपलाइन की निगरानी और दूषित पानी की शिकायतों पर तत्काल कार्रवाई नहीं होने से हालात बिगड़ते गए।
भागीरथपुरा में दूषित पानी पीने के बाद बड़ी संख्या में लोग बीमार हुए थे। कई लोगों को अस्पतालों में भर्ती कराया गया था, जबकि उपचार के दौरान 36 लोगों की मौत हो गई थी। इस घटना के बाद प्रशासन और नगर निगम की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठे थे।
जांच आयोग ने मामले में जिम्मेदार व्यवस्थाओं की समीक्षा करते हुए कई कमियों की ओर इशारा किया है। रिपोर्ट में जल सप्लाई सिस्टम की निगरानी, पाइपलाइन रखरखाव और पानी की नियमित जांच को लेकर सुधार की जरूरत बताई गई है।
घटना के बाद प्रशासन ने प्रभावित क्षेत्र में स्वास्थ्य शिविर लगाए थे और पानी के सैंपल की जांच कराई गई थी। इसके अलावा दूषित जल आपूर्ति के कारणों का पता लगाने के लिए अलग-अलग स्तर पर जांच शुरू की गई थी।
स्थानीय लोगों का कहना है कि अगर समय रहते शिकायतों पर ध्यान दिया जाता तो कई लोगों की जान बचाई जा सकती थी। इस हादसे ने शहरों में पेयजल व्यवस्था और नागरिकों के स्वास्थ्य से जुड़े मुद्दों को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
अब न्यायिक जांच रिपोर्ट सामने आने के बाद जिम्मेदार अधिकारियों और विभागों की भूमिका पर फिर चर्चा शुरू हो गई है। प्रशासन की ओर से रिपोर्ट के आधार पर आगे की कार्रवाई को लेकर निर्णय लिया जा सकता है।
भागीरथपुरा की घटना ने यह साफ कर दिया है कि पेयजल जैसी मूलभूत सुविधा में लापरवाही का परिणाम कितना गंभीर हो सकता है। विशेषज्ञों का कहना है कि भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए जल आपूर्ति व्यवस्था की नियमित निगरानी और जवाबदेही तय करना बेहद जरूरी है।