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मध्य प्रदेश में बनेगा देश का पहला इंटीग्रेटेड टेलीकॉम टेक्नोलॉजी इकोसिस्टम, ग्वालियर में विकसित होगा बड़ा केंद्र

 

मध्य प्रदेश अब टेलीकॉम और इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग के क्षेत्र में नई पहचान बनाने की दिशा में आगे बढ़ रहा है। दिल्ली में मध्य प्रदेश सरकार और केंद्रीय दूरसंचार विभाग के बीच हुए समझौता ज्ञापन (MoU) के बाद ग्वालियर में देश का पहला इंटीग्रेटेड टेलीकॉम टेक्नोलॉजी इकोसिस्टम विकसित करने की योजना को गति मिली है।

इस परियोजना का उद्देश्य टेलीकॉम उपकरण निर्माण, तकनीकी अनुसंधान, नवाचार और कौशल विकास को एक ही स्थान पर बढ़ावा देना है। इससे प्रदेश में निवेश के नए अवसर खुलेंगे और युवाओं के लिए रोजगार के नए रास्ते तैयार होंगे।

ग्वालियर बनेगा टेलीकॉम हब

प्रस्तावित इकोसिस्टम के तहत ग्वालियर में टेलीकॉम क्षेत्र से जुड़ी कंपनियों, स्टार्टअप, शोध संस्थानों और प्रशिक्षण केंद्रों को एक साथ विकसित किया जाएगा। इससे मोबाइल नेटवर्क, संचार उपकरण और इलेक्ट्रॉनिक्स निर्माण से जुड़े उद्योगों को बढ़ावा मिलने की उम्मीद है।

केंद्र और राज्य सरकार के बीच हुआ समझौता

दिल्ली में हुए एमओयू के बाद इस परियोजना को लेकर केंद्र और राज्य सरकार के बीच सहयोग का रास्ता साफ हुआ है। सरकार का लक्ष्य है कि मध्य प्रदेश को टेलीकॉम टेक्नोलॉजी और इलेक्ट्रॉनिक्स निर्माण के प्रमुख केंद्रों में शामिल किया जाए।

निवेश और रोजगार को मिलेगा बढ़ावा

अधिकारियों के अनुसार, इंटीग्रेटेड टेलीकॉम टेक्नोलॉजी इकोसिस्टम बनने से प्रदेश में बड़े निवेश आकर्षित होंगे। इसके साथ ही इंजीनियरिंग, तकनीकी और अन्य क्षेत्रों में युवाओं के लिए रोजगार के अवसर पैदा होंगे।

इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग को मिलेगी नई गति

मध्य प्रदेश सरकार लगातार इलेक्ट्रॉनिक्स और आईटी क्षेत्र में निवेश बढ़ाने पर जोर दे रही है। इस परियोजना के जरिए प्रदेश में टेलीकॉम उपकरणों के निर्माण और सप्लाई चेन को मजबूत करने की दिशा में काम किया जाएगा।

तकनीकी विकास की ओर बड़ा कदम

विशेषज्ञों का मानना है कि ग्वालियर में विकसित होने वाला यह इकोसिस्टम प्रदेश के औद्योगिक विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है। इससे न केवल टेलीकॉम सेक्टर को मजबूती मिलेगी, बल्कि मध्य प्रदेश देश के तकनीकी मानचित्र पर भी अपनी अलग पहचान बना सकेगा।

सरकार का कहना है कि यह परियोजना आत्मनिर्भर भारत अभियान और देश में स्वदेशी तकनीक को बढ़ावा देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम साबित होगी। आने वाले समय में इससे प्रदेश में नई तकनीकी क्षमताओं का विकास होने की उम्मीद है।