जयपुर से मंगाई इंक, गार्ड और स्वीपर को लाखों का भुगतान; जबलपुर के स्कूल में सफाई का बिल 10 हजार रुपये, RTI से खुला कथित फर्जीवाड़ा
मध्य प्रदेश के जबलपुर में एक स्कूल से जुड़ा वित्तीय अनियमितता का मामला सामने आया है। आरोप है कि स्कूल में खर्च और भुगतान के रिकॉर्ड में गड़बड़ी की गई। मामले में जयपुर से इंक मंगाने, गार्ड और स्वीपर को लाखों रुपये का भुगतान करने तथा सफाई के नाम पर 10 हजार रुपये का बिल दर्ज होने जैसे बिंदु सामने आए हैं। सूचना का अधिकार (RTI) के तहत प्राप्त जानकारी के बाद स्कूल के प्रिंसिपल की कार्यप्रणाली पर सवाल उठने लगे हैं।
मामले में सामने आई जानकारी के अनुसार, स्कूल के खर्चों और भुगतान से संबंधित दस्तावेजों की पड़ताल की गई। इसमें अलग-अलग मदों में किए गए भुगतान को लेकर सवाल उठाए गए हैं। खास तौर पर गार्ड और स्वीपर के नाम पर लाखों रुपये के भुगतान तथा सफाई के बिल को लेकर अनियमितता की आशंका जताई गई है।
RTI से सामने आई खर्चों की जानकारी
सूचना का अधिकार अधिनियम के तहत मांगी गई जानकारी से स्कूल के वित्तीय रिकॉर्ड की पड़ताल का रास्ता खुला। उपलब्ध जानकारी के आधार पर स्कूल में किए गए खर्चों और भुगतान के विवरण पर सवाल उठाए जा रहे हैं। जयपुर से इंक मंगाने के मामले ने भी ध्यान खींचा है। हालांकि, इंक की खरीद पर खर्च की गई वास्तविक राशि और खरीद की परिस्थितियों का विस्तृत विवरण उपलब्ध नहीं है।
गार्ड और स्वीपर के भुगतान पर सवाल
स्कूल में गार्ड और स्वीपर को लाखों रुपये का भुगतान किए जाने की जानकारी सामने आने के बाद भुगतान के आधार और संबंधित रिकॉर्ड की जांच की मांग उठ सकती है। ऐसे मामलों में भुगतान रजिस्टर, बिल-वाउचर, उपस्थिति रिकॉर्ड और संबंधित स्वीकृतियों का मिलान करना महत्वपूर्ण होता है, ताकि पता लगाया जा सके कि भुगतान नियमों के अनुसार किया गया या नहीं।
सफाई के बिल को लेकर भी उठे सवाल
मामले में स्कूल की सफाई के लिए 10 हजार रुपये का बिल भी चर्चा में है। इस बिल और अन्य खर्चों के बीच संबंध को लेकर सवाल उठाए जा रहे हैं। RTI से मिले दस्तावेजों के आधार पर कथित अनियमितताओं की वास्तविक स्थिति जांच के बाद ही स्पष्ट हो सकेगी।
फिलहाल उपलब्ध जानकारी के आधार पर प्रिंसिपल पर लगाए गए आरोपों को प्रमाणित निष्कर्ष नहीं माना जा सकता। मामले में संबंधित अधिकारियों की जांच, दस्तावेजों के सत्यापन और स्कूल प्रबंधन का पक्ष सामने आने के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि वित्तीय नियमों का उल्लंघन हुआ है या नहीं।