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छिंदवाड़ा में सावन में भी जलसंकट का खतरा: कन्हरगांव डेम 706.9 मीटर पर अटका, 31 वार्डों में एक दिन छोड़कर पानी

 

छिंदवाड़ा में सावन के महीने में भी जलसंकट का खतरा मंडरा रहा है। पर्याप्त बारिश नहीं होने से शहर की जलापूर्ति व्यवस्था पर असर पड़ने लगा है। कन्हरगांव डेम का जलस्तर 706.9 मीटर पर अटक गया है और जलस्तर में अपेक्षित बढ़ोतरी नहीं होने से नगर निगम के सामने पेयजल आपूर्ति को लेकर चिंता बढ़ गई है। फिलहाल शहर के 31 वार्डों में एक दिन छोड़कर पानी की सप्लाई की जा रही है।

मानसून के दौरान अच्छी बारिश की उम्मीद की जाती है, लेकिन इस बार बारिश का दौर कमजोर रहने से जलस्रोतों में पानी की आवक प्रभावित हुई है। कन्हरगांव डेम शहर की पेयजल व्यवस्था के लिए महत्वपूर्ण जलस्रोतों में शामिल है। डेम का जलस्तर लगातार स्थिर रहने के कारण आने वाले दिनों में जलापूर्ति को लेकर स्थिति चुनौतीपूर्ण हो सकती है।

31 वार्डों में एक दिन छोड़कर पानी

शहर के 31 वार्डों में फिलहाल एक दिन के अंतराल से पेयजल की सप्लाई की जा रही है। जलसंकट की स्थिति को देखते हुए नगर निगम पानी के इस्तेमाल को लेकर लोगों से सावधानी बरतने की अपील कर रहा है। अधिकारियों की नजर डेम के जलस्तर और शहर की रोजाना पानी की जरूरत पर बनी हुई है।

स्थानीय लोगों का कहना है कि सावन जैसे बारिश वाले महीने में भी यदि जलस्रोतों का स्तर नहीं बढ़ता है तो आने वाले समय में परेशानी और बढ़ सकती है। कई इलाकों में लोगों को पानी के लिए अतिरिक्त इंतजाम करने पड़ रहे हैं।

बारिश नहीं हुई तो और बढ़ेगी परेशानी

कन्हरगांव डेम में पानी की आवक बढ़ाने के लिए अब अच्छी बारिश बेहद जरूरी मानी जा रही है। यदि आने वाले दिनों में पर्याप्त बारिश नहीं होती है तो जलापूर्ति का अंतर और बढ़ सकता है। मौजूदा परिस्थितियों में शहर में 2 से 3 दिन के अंतराल पर पानी की सप्लाई किए जाने की नौबत आने की आशंका जताई जा रही है।

नगर निगम के लिए सबसे बड़ी चुनौती उपलब्ध पानी का संतुलित तरीके से इस्तेमाल करना है। अधिकारियों को जलस्रोत की स्थिति के आधार पर आगे की आपूर्ति व्यवस्था तय करनी होगी।

लोगों से पानी बचाने की अपील

जलसंकट की आशंका को देखते हुए लोगों से पानी की बर्बादी रोकने और जरूरत के मुताबिक ही पानी इस्तेमाल करने की अपील की जा रही है। खासकर घरेलू कामों में पानी का अनावश्यक उपयोग नहीं करने की सलाह दी जा रही है।

मानसून की कमजोर स्थिति के बीच अब शहरवासियों की नजर बारिश पर टिकी है। यदि अच्छी बारिश होती है तो कन्हरगांव डेम में पानी की आवक बढ़ सकती है और पेयजल संकट का खतरा कुछ कम हो सकता है। लेकिन बारिश का दौर कमजोर रहा तो छिंदवाड़ा में जलापूर्ति व्यवस्था पर दबाव और बढ़ने की संभावना है।