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1981 में 21 रुपये में खरीदी मां दुर्गा की प्रतिमा, 10 किलोमीटर कंधों पर उठाकर गांव लाए थे चार युवा

 

मां दुर्गा के प्रति आस्था और समर्पण की एक अनोखी कहानी सामने आई है। साल 1981 में चार युवाओं ने महज 21 रुपये में मां दुर्गा की प्रतिमा खरीदी थी। उस समय प्रतिमा को गांव तक लाने के लिए किसी वाहन की व्यवस्था नहीं थी। ऐसे में चारों युवाओं ने प्रतिमा को अपने कंधों पर उठाया और करीब 10 किलोमीटर की दूरी तय कर उसे गांव लेकर पहुंचे। वर्षों पुरानी यह घटना आज भी लोगों की आस्था और श्रद्धा से जुड़ी याद के रूप में देखी जाती है।

21 रुपये में खरीदी थी मां दुर्गा की प्रतिमा

जानकारी के अनुसार, साल 1981 में चार युवाओं ने मां दुर्गा की प्रतिमा खरीदने का निर्णय लिया था। उस समय प्रतिमा की कीमत 21 रुपये थी। युवाओं के लिए यह केवल प्रतिमा खरीदने की बात नहीं थी, बल्कि मां दुर्गा के प्रति उनकी गहरी श्रद्धा और गांव में धार्मिक परंपरा को आगे बढ़ाने का संकल्प भी था।

प्रतिमा खरीदने के बाद उसे गांव तक पहुंचाने की चुनौती सामने आई। साधनों की कमी के बावजूद युवाओं ने हिम्मत नहीं हारी और प्रतिमा को कंधों पर उठाकर गांव ले जाने का फैसला किया।

10 किलोमीटर तक कंधों पर उठाकर लाए प्रतिमा

चारों युवा मां दुर्गा की प्रतिमा को कंधों पर लेकर करीब 10 किलोमीटर तक चले। लंबी दूरी तय करने के बाद वे प्रतिमा को गांव लेकर पहुंचे। युवाओं के इस प्रयास ने ग्रामीणों के बीच श्रद्धा और उत्साह का माहौल बनाया।

आज के दौर में जहां धार्मिक आयोजनों के लिए आधुनिक सुविधाओं और संसाधनों का इस्तेमाल किया जाता है, वहीं यह घटना उस समय के लोगों की सादगी और समर्पण की याद दिलाती है।

आस्था से जुड़ी पुरानी याद

मां दुर्गा की प्रतिमा को लेकर आने की यह कहानी केवल 21 रुपये की कीमत या 10 किलोमीटर की दूरी तक सीमित नहीं है। यह उन युवाओं की श्रद्धा और सामूहिक प्रयास की कहानी है, जिन्होंने सीमित संसाधनों के बावजूद अपनी आस्था को प्राथमिकता दी।

हालांकि, उपलब्ध जानकारी में गांव का नाम, चारों युवाओं की पहचान और प्रतिमा से जुड़ी वर्तमान परंपरा का विस्तृत विवरण नहीं दिया गया है। इन जानकारियों के सामने आने पर इस पुरानी घटना के बारे में और स्पष्ट जानकारी मिल सकेगी।