पेट्रोल-डीजल की कीमतों से आगे बढ़ा असर: अमेरिका-ईरान तनाव का प्रभाव अब भारत में कैंसर इलाज पर भी
पेट्रोल-डीजल और कच्चे तेल (क्रूड ऑयल) की बढ़ती कीमतों को लेकर वैश्विक बाजारों में पहले से ही हलचल बनी हुई है, लेकिन अमेरिका-ईरान तनाव का असर अब सिर्फ ऊर्जा क्षेत्र तक सीमित नहीं रह गया है। ताजा रिपोर्ट्स के अनुसार, इस भू-राजनीतिक तनाव का अप्रत्यक्ष असर भारत में कैंसर के इलाज और दवाओं की उपलब्धता पर भी देखने को मिल रहा है।
जानकारों का कहना है कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर तेल और लॉजिस्टिक्स लागत बढ़ने से दवा निर्माण, कच्चे माल की सप्लाई चेन और आयात-निर्यात पर दबाव बढ़ा है। इसका असर उन जीवन रक्षक दवाओं पर भी पड़ रहा है, जिनमें कई बार विदेशी कच्चे माल का इस्तेमाल होता है।
सप्लाई चेन पर बढ़ा दबाव
विशेषज्ञों के मुताबिक, क्रूड ऑयल की कीमतों में उतार-चढ़ाव का सीधा असर ट्रांसपोर्ट और उत्पादन लागत पर पड़ता है। दवा उद्योग में उपयोग होने वाले रसायनों और पैकेजिंग मटेरियल की लागत भी बढ़ी है, जिससे कुछ कैंसर दवाओं की उपलब्धता और कीमतों पर असर पड़ने की आशंका जताई जा रही है।
मरीजों की चिंता बढ़ी
ऑन्कोलॉजी (कैंसर) विशेषज्ञों का कहना है कि कुछ महत्वपूर्ण दवाओं की सप्लाई में देरी या कीमतों में वृद्धि मरीजों और उनके परिवारों के लिए अतिरिक्त बोझ बन सकती है। हालांकि, फिलहाल स्थिति नियंत्रण में है, लेकिन विशेषज्ञ लगातार निगरानी की बात कर रहे हैं।
सरकार और एजेंसियों की नजर
सरकारी एजेंसियां और स्वास्थ्य विभाग भी स्थिति पर नजर बनाए हुए हैं। दवा आपूर्ति में किसी भी तरह की बाधा न आए, इसके लिए घरेलू उत्पादन और वैकल्पिक सप्लाई चैनल्स पर काम किया जा रहा है।
वैश्विक तनाव का व्यापक असर
विश्लेषकों का मानना है कि अंतरराष्ट्रीय संघर्षों का असर अब केवल तेल बाजार तक सीमित नहीं है, बल्कि इसका सीधा प्रभाव स्वास्थ्य सेवाओं और आवश्यक दवाओं तक पहुंच पर भी पड़ने लगा है।