मानसून प्रतिबंध के बावजूद सिंध नदी में धड़ल्ले से अवैध रेत उत्खनन, प्रशासनिक सख्ती पर उठे सवाल
मानसून सत्र के दौरान नदियों से रेत उत्खनन पर जिला प्रशासन द्वारा प्रतिबंध लगाए जाने के बावजूद सिंध नदी में अवैध रेत खनन लगातार जारी है। जिले के अमायन और भारौली थाना क्षेत्र में रेत माफिया बेखौफ होकर प्रतिबंधित अवधि में भी रेत का उत्खनन कर रहे हैं। इससे प्रशासन की कार्रवाई और निगरानी व्यवस्था पर सवाल उठने लगे हैं।
जानकारी के अनुसार, मानसून के दौरान नदी के प्राकृतिक प्रवाह और पर्यावरण संरक्षण को ध्यान में रखते हुए प्रशासन हर वर्ष रेत उत्खनन पर रोक लगाता है। इसके बावजूद सिंध नदी के कई घाटों पर अवैध खनन की गतिविधियां लगातार जारी हैं। स्थानीय लोगों का आरोप है कि दिन-रात मशीनों और वाहनों के जरिए रेत निकाली जा रही है।
ग्रामीणों का कहना है कि प्रतिबंध के बावजूद हो रहे इस अवैध उत्खनन से न केवल सरकार को राजस्व का नुकसान हो रहा है, बल्कि नदी के अस्तित्व और पर्यावरण पर भी प्रतिकूल प्रभाव पड़ रहा है। भारी मशीनों के इस्तेमाल से नदी का स्वरूप बदलने और जल प्रवाह प्रभावित होने की आशंका भी जताई जा रही है।
स्थानीय लोगों ने आरोप लगाया कि कई बार शिकायत किए जाने के बावजूद अवैध खनन पर प्रभावी कार्रवाई नहीं हो रही है। उनका कहना है कि यदि समय रहते सख्त कदम नहीं उठाए गए तो मानसून के दौरान नदी और आसपास के क्षेत्रों में कटाव तथा अन्य पर्यावरणीय समस्याएं बढ़ सकती हैं।
खनन नियमों के अनुसार, मानसून अवधि में नदियों से रेत का उत्खनन प्रतिबंधित रहता है। इसका उद्देश्य नदी की पारिस्थितिकी, जल प्रवाह और जैव विविधता की रक्षा करना है। ऐसे में प्रतिबंध के बावजूद खनन होना नियमों के उल्लंघन के साथ-साथ पर्यावरण के लिए भी गंभीर चिंता का विषय माना जा रहा है।
प्रशासनिक अधिकारियों का कहना है कि अवैध खनन की शिकायतों की जांच कराई जाएगी और दोषियों के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी। खनिज विभाग, राजस्व और पुलिस की संयुक्त टीमों को निगरानी बढ़ाने तथा अवैध उत्खनन में शामिल लोगों के खिलाफ सख्त कार्रवाई के निर्देश दिए गए हैं।
फिलहाल सिंध नदी में जारी अवैध रेत उत्खनन को लेकर स्थानीय लोगों में नाराजगी बनी हुई है। अब सभी की निगाहें प्रशासन की अगली कार्रवाई पर टिकी हैं कि प्रतिबंध के बावजूद सक्रिय रेत माफिया पर कब और कितनी प्रभावी कार्रवाई की जाती है।