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“मैं जान बचाकर भाग गया पर दोस्त राख हो गया”: पटाखा फैक्ट्री ब्लास्ट की आपबीती सुन कांप जाऐगा कलेजा, सैंकडों कॉल के बाद आई एंबुलेंस

 

टोंककलां इलाके में पटाखा फैक्ट्री में हुए भीषण विस्फोट ने कई जिंदगियों को पल भर में बदल दिया। धमाके के बाद घटनास्थल पर जो मंजर था, वह इतना भयावह था कि लोग अपनों को बचाने के लिए भागे, लेकिन लौटकर देखा तो हालात दिल दहला देने वाले थे।

प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक, विस्फोट के तुरंत बाद फैक्ट्री में अफरा-तफरी मच गई। कई मजदूर जान बचाकर बाहर की ओर भागे, लेकिन कुछ लोग आग और मलबे में फंस गए। एक मजदूर ने बताया कि वह किसी तरह बाहर निकल आया, लेकिन जब वापस अपने साथी को ढूंढने गया तो वह बुरी तरह झुलसा हुआ पड़ा था।

घटना के बाद सबसे चौंकाने वाली बात यह रही कि स्थानीय लोगों ने मदद के लिए बार-बार कॉल किए। बताया जा रहा है कि करीब 72 बार एंबुलेंस को फोन किया गया, लेकिन समय पर मदद नहीं पहुंच सकी। इस देरी के चलते घायलों को मजबूरी में स्थानीय लोगों और पुलिस की मदद से कंधों पर उठाकर बाहर निकाला गया और अस्पताल भेजा गया।

घटनास्थल पर चारों ओर धुआं, जलते हुए मलबे और चीख-पुकार का माहौल था। लोग अपने साथियों को ढूंढते हुए आग और मलबे के बीच दौड़ते नजर आए। कई लोगों ने बिना सुरक्षा उपकरणों के ही घायलों को बाहर निकालने का जोखिम उठाया।

स्थानीय लोगों का आरोप है कि अगर एंबुलेंस और बचाव टीम समय पर पहुंच जाती, तो कई जिंदगियां बचाई जा सकती थीं। हादसे के बाद प्रशासन की व्यवस्था पर भी सवाल उठने लगे हैं।

पुलिस और प्रशासनिक अधिकारी मौके पर पहुंचकर राहत और बचाव कार्य में जुटे हैं। घायलों को नजदीकी अस्पतालों में भर्ती कराया गया है, जहां कई की हालत गंभीर बताई जा रही है।

विस्फोट के कारणों की जांच जारी है। शुरुआती आशंका है कि पटाखा निर्माण के दौरान किसी रासायनिक प्रक्रिया या सुरक्षा चूक के चलते यह बड़ा हादसा हुआ। प्रशासन ने फैक्ट्री लाइसेंस और सुरक्षा मानकों की भी जांच शुरू कर दी है।

यह दर्दनाक घटना न केवल एक औद्योगिक हादसा है, बल्कि आपातकालीन सेवाओं की प्रतिक्रिया प्रणाली पर भी गंभीर सवाल खड़े करती है। फिलहाल इलाके में मातम का माहौल है और लोग अपने परिचितों की सलामती को लेकर परेशान हैं।