फर्जी IAS तृप्ति का हाईप्रोफाइल फर्जीवाड़ा: महंगी कार, लग्जरी होटल और CBI कार्ड से जमाती थी रौब, गाड़ी पर लगाई थी भारत सरकार की नेम प्लेट
फर्जी पहचान बनाकर लोगों को धोखा देने वाली तृप्ति नाम की महिला को लेकर नए खुलासे सामने आए हैं। आरोप है कि वह खुद को IAS अधिकारी बताकर लोगों पर प्रभाव जमाती थी। अपने फर्जी रुतबे को दिखाने के लिए वह महंगी कार, लग्जरी होटल और महंगे मोबाइल फोन का इस्तेमाल करती थी।
जांच में सामने आया है कि तृप्ति के पास कथित तौर पर CBI का कार्ड भी था। इतना ही नहीं, उसकी गाड़ी पर भारत सरकार की नेम प्लेट लगाई गई थी, ताकि लोग उसकी पहचान पर शक न करें।
IAS अधिकारी बनकर दिखाती थी प्रभाव
जानकारी के अनुसार, तृप्ति लोगों के बीच खुद को बड़े सरकारी पद पर तैनात अधिकारी बताती थी। वह अपनी जीवनशैली के जरिए लोगों को विश्वास दिलाने की कोशिश करती थी कि वह वास्तव में प्रशासनिक अधिकारी है।
महंगी कारों में घूमना, बड़े होटलों में ठहरना और महंगे सामानों का इस्तेमाल करना उसके दिखावे का हिस्सा था। इसी के जरिए वह लोगों पर अपना प्रभाव बनाती थी।
CBI कार्ड और सरकारी नेम प्लेट का इस्तेमाल
जांच में यह भी सामने आया है कि तृप्ति कथित तौर पर CBI से जुड़ा कार्ड रखती थी। इसके अलावा उसकी कार पर भारत सरकार लिखी नेम प्लेट भी लगी हुई थी।
इन चीजों का इस्तेमाल वह अपनी फर्जी पहचान को मजबूत करने के लिए करती थी। पुलिस और जांच एजेंसियां अब यह पता लगाने में जुटी हैं कि उसने यह सामान कहां से हासिल किया और इसका इस्तेमाल किन-किन जगहों पर किया गया।
महंगी कार और होटल में रुकने की जानकारी
बताया जा रहा है कि तृप्ति अपनी हाईप्रोफाइल लाइफस्टाइल के जरिए लोगों को प्रभावित करती थी। वह महंगी गाड़ियों में चलती थी और लग्जरी होटलों में ठहरती थी।
उसकी इस जीवनशैली को देखकर कई लोग उसकी बातों पर भरोसा कर लेते थे। इसी भरोसे का फायदा उठाकर वह कथित तौर पर अपना नेटवर्क बना रही थी।
जांच एजेंसियां जुटा रहीं जानकारी
मामला सामने आने के बाद पुलिस और संबंधित एजेंसियां पूरे फर्जीवाड़े की जांच कर रही हैं। उसके दस्तावेजों, पहचान पत्रों और इस्तेमाल किए गए सामानों की जांच की जा रही है।
जांच में यह भी पता लगाया जा रहा है कि क्या उसने फर्जी IAS बनकर किसी व्यक्ति या संस्था को आर्थिक या अन्य नुकसान पहुंचाया है।
फिलहाल फर्जी अधिकारी बनकर रौब जमाने का यह मामला चर्चा में है। जांच पूरी होने के बाद ही पूरे नेटवर्क और इसके पीछे जुड़े अन्य लोगों की जानकारी सामने आ सकेगी।