शिवपुरी सीवरेज प्रोजेक्ट पर हाईकोर्ट की सख्त टिप्पणी: 111 करोड़ की परियोजना पर सरकार की कार्यप्रणाली पर उठाए गंभीर सवाल
शिवपुरी में 111 करोड़ रुपये की सीवरेज परियोजना को लेकर दायर मामले की सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने राज्य सरकार की कार्यप्रणाली पर कड़ी नाराजगी जताई है। अदालत ने टिप्पणी करते हुए कहा कि इतनी बड़ी राशि की परियोजना में अनियमितताओं और कथित बर्बादी के बावजूद सरकार की स्थिति “गहरी नींद (हाइबरनेशन)” जैसी प्रतीत होती है।
111 करोड़ की परियोजना पर सवाल
मामला शिवपुरी की सीवरेज योजना से जुड़ा है, जिसकी लागत लगभग 111 करोड़ रुपये बताई जा रही है। सुनवाई के दौरान अदालत के समक्ष यह तथ्य रखा गया कि परियोजना को लेकर कई मुद्दे लंबे समय से लंबित हैं, लेकिन अब तक उनका प्रभावी समाधान नहीं किया गया।
हाईकोर्ट ने इस पर नाराजगी जताते हुए कहा कि डेढ़ साल बीत जाने के बाद भी स्थिति स्पष्ट नहीं होना गंभीर लापरवाही को दर्शाता है।
सरकार की कार्यप्रणाली पर टिप्पणी
अदालत ने सुनवाई के दौरान राज्य सरकार की कार्यप्रणाली पर सख्त टिप्पणी करते हुए कहा कि इतने बड़े सार्वजनिक धन के उपयोग के बावजूद जिम्मेदार विभागों की उदासीनता चिंता का विषय है।
कोर्ट ने यह भी कहा कि परियोजना से जुड़े मामलों में समय पर निर्णय और निगरानी की कमी के कारण न केवल धन की बर्बादी हुई है, बल्कि जनहित भी प्रभावित हुआ है।
जवाबदेही पर जोर
हाईकोर्ट ने मामले में संबंधित विभागों से जवाब मांगा है और स्पष्ट किया है कि सार्वजनिक धन के उपयोग में किसी भी तरह की लापरवाही स्वीकार नहीं की जा सकती। अदालत ने अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि वे परियोजना की स्थिति पर विस्तृत रिपोर्ट प्रस्तुत करें।
जनहित से जुड़ा मामला
सीवरेज परियोजना शहरी बुनियादी ढांचे और स्वच्छता से जुड़ी एक महत्वपूर्ण योजना मानी जाती है। ऐसे में इसके क्रियान्वयन में देरी और अनियमितताओं को लेकर उठे सवाल सीधे तौर पर जनता की सुविधाओं से जुड़े हुए हैं।
आगे की सुनवाई पर नजर
मामले की अगली सुनवाई में सरकार से विस्तृत जवाब प्रस्तुत करने को कहा गया है। अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि प्रशासन इस पर क्या स्पष्टीकरण देता है और परियोजना को लेकर आगे क्या कदम उठाए जाते हैं।