खनन घोटाले पर हाईकोर्ट की सख्त टिप्पणी: अफसरों-माफिया की सांठगांठ पर सरकार से जवाब तलब, पूछे तीखे सवाल
ग्वालियर हाईकोर्ट की डबल बेंच में खनन से जुड़े कथित घोटाले पर सुनवाई के दौरान राज्य सरकार की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठाए गए। मामला खनिज विभाग के कुछ अधिकारियों और खनन माफिया के बीच मिलीभगत से अवैध खनन और उससे जुड़े वित्तीय अनियमितताओं से संबंधित बताया जा रहा है।
सुनवाई के दौरान कोर्ट ने टिप्पणी करते हुए कहा कि यदि सरकारी तंत्र के भीतर ही कुछ अधिकारी माफिया के साथ मिलकर काम कर रहे हैं, तो यह बेहद गंभीर स्थिति है और इससे राज्य के राजस्व को भारी नुकसान हो सकता है। कोर्ट ने सरकार से इस पूरे मामले में अब तक की गई कार्रवाई का विस्तृत ब्योरा मांगा है।
हाईकोर्ट की डबल बेंच ने स्पष्ट किया कि अवैध खनन और उससे जुड़े मामलों को केवल प्रशासनिक कार्रवाई तक सीमित नहीं रखा जा सकता, बल्कि इसमें जिम्मेदारी तय करना भी जरूरी है। कोर्ट ने सरकार से पूछा है कि संबंधित अधिकारियों पर क्या अनुशासनात्मक और कानूनी कार्रवाई की गई है और आगे की रणनीति क्या है।
मामले की गंभीरता को देखते हुए राज्य सरकार की ओर से भी विस्तृत जवाब तैयार किए जाने की संभावना जताई जा रही है। प्रशासनिक सूत्रों के अनुसार, खनन गतिविधियों और अवैध उत्खनन पर नियंत्रण के लिए पहले भी कई कदम उठाए गए हैं, लेकिन कोर्ट की टिप्पणी के बाद अब इस दिशा में और सख्त कार्रवाई की जरूरत महसूस की जा रही है।
यह मामला सामने आने के बाद खनिज विभाग और प्रशासनिक तंत्र की कार्यप्रणाली पर एक बार फिर सवाल खड़े हो गए हैं। अवैध खनन को लेकर पहले भी प्रदेश के कई हिस्सों में शिकायतें सामने आती रही हैं, लेकिन इस बार मामला सीधे हाईकोर्ट की डबल बेंच तक पहुंचने से इसकी गंभीरता और बढ़ गई है।
कोर्ट ने सरकार से यह भी स्पष्ट करने को कहा है कि अवैध खनन रोकने के लिए मौजूदा निगरानी तंत्र कितना प्रभावी है और इसमें सुधार की क्या संभावनाएं हैं। साथ ही भविष्य में इस तरह की घटनाओं को रोकने के लिए क्या ठोस कदम उठाए जा रहे हैं, इसका भी विस्तृत जवाब मांगा गया है।
फिलहाल मामले की अगली सुनवाई में सरकार का जवाब अहम माना जा रहा है। कोर्ट की सख्ती के बाद पूरे प्रशासनिक तंत्र में हलचल है और इस प्रकरण पर सभी की नजरें टिकी हुई हैं।