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हाईकोर्ट से छिंदवाड़ा के निलंबित CMHO को राहत नहीं: डॉ. गुन्नाड़े को 10 दिन में विभागीय अपील करने के निर्देश, CM ने किया था सस्पेंड

 

छिंदवाड़ा के निलंबित मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. गुन्नाड़े को हाईकोर्ट से फिलहाल राहत नहीं मिली है। हाईकोर्ट की जबलपुर बेंच ने उनकी याचिका पर सुनवाई करते हुए उन्हें विभागीय अपील का रास्ता अपनाने के निर्देश दिए हैं। अदालत ने डॉ. गुन्नाड़े को 10 दिन के भीतर विभागीय स्तर पर अपील प्रस्तुत करने को कहा है।

डॉ. गुन्नाड़े को मुख्यमंत्री के निर्देश पर निलंबित किया गया था। निलंबन आदेश के खिलाफ उन्होंने हाईकोर्ट का रुख किया था। याचिका में निलंबन की कार्रवाई को चुनौती देते हुए राहत की मांग की गई थी। हालांकि, सुनवाई के दौरान अदालत ने तत्काल निलंबन पर रोक लगाने के बजाय पहले विभागीय अपील करने का निर्देश दिया।

निलंबन के खिलाफ हाईकोर्ट पहुंचे थे CMHO

जानकारी के अनुसार, छिंदवाड़ा के तत्कालीन CMHO डॉ. गुन्नाड़े के खिलाफ प्रशासनिक स्तर पर कार्रवाई की गई थी। मुख्यमंत्री द्वारा उन्हें निलंबित किए जाने के बाद विभाग की ओर से संबंधित आदेश जारी किया गया।

निलंबन के बाद डॉ. गुन्नाड़े ने हाईकोर्ट में याचिका दायर कर कार्रवाई को चुनौती दी। उनका पक्ष था कि निलंबन की कार्रवाई के खिलाफ उन्हें न्यायिक राहत दी जाए। मामले की सुनवाई के दौरान कोर्ट ने कहा कि पहले संबंधित विभाग के समक्ष अपील का विकल्प उपलब्ध है, इसलिए याचिकाकर्ता को उस प्रक्रिया का पालन करना चाहिए।

10 दिन में करनी होगी विभागीय अपील

हाईकोर्ट ने डॉ. गुन्नाड़े को 10 दिन के भीतर विभागीय अपील प्रस्तुत करने के निर्देश दिए हैं। अब उन्हें अपने निलंबन के खिलाफ विभागीय स्तर पर अपना पक्ष रखना होगा। इसके बाद संबंधित विभाग उनकी अपील और मामले से जुड़े दस्तावेजों पर विचार करेगा।

कोर्ट के इस आदेश के बाद फिलहाल डॉ. गुन्नाड़े के निलंबन पर कोई राहत नहीं मिली है। उन्हें विभागीय प्रक्रिया पूरी करनी होगी।

विभागीय जांच में सामने आएगा पक्ष

निलंबन से जुड़े आरोपों और कार्रवाई के आधार को लेकर विभागीय स्तर पर आगे की प्रक्रिया होगी। विभागीय अपील में डॉ. गुन्नाड़े अपनी ओर से तथ्यों और दस्तावेजों के आधार पर पक्ष रख सकेंगे।

हाईकोर्ट के निर्देश के बाद अब पूरा मामला विभागीय अपील की प्रक्रिया पर निर्भर करेगा। यदि विभागीय स्तर पर उन्हें राहत नहीं मिलती है तो वे आगे उपलब्ध कानूनी विकल्पों का सहारा ले सकते हैं।

फिलहाल हाईकोर्ट के आदेश से डॉ. गुन्नाड़े को तत्काल राहत नहीं मिली है। उन्हें निर्धारित 10 दिन की अवधि में विभागीय अपील दायर करनी होगी। इसके बाद विभाग के निर्णय के आधार पर मामले की अगली दिशा तय होगी।