रेरा चेयरमैन नियुक्ति विवाद पर हाईकोर्ट का बड़ा निर्देश, फाइल लौटाई नगरीय विकास विभाग को
मध्यप्रदेश रियल एस्टेट रेगुलेटरी अथॉरिटी (रेरा) में चेयरमैन और सदस्यों की नियुक्ति प्रक्रिया से जुड़ी फाइल पर हाईकोर्ट ने महत्वपूर्ण टिप्पणी करते हुए उसे नगरीय विकास एवं आवास विभाग को वापस लौटा दिया है। अदालत ने स्पष्ट कहा है कि रेरा चेयरमैन पद की नियुक्ति को लेकर यह कहीं भी उल्लेख नहीं है कि यह पद केवल रिटायर्ड आईएएस अधिकारी को ही दिया जाएगा।
इस मामले में सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने नियुक्ति प्रक्रिया में अपनाई जा रही व्याख्या और पात्रता मानदंडों पर सवाल उठाए। अदालत ने कहा कि नियमों में ऐसा कोई स्पष्ट प्रावधान नहीं है जो इस पद को केवल प्रशासनिक सेवा से सेवानिवृत्त अधिकारियों तक सीमित करता हो।
न्यायालय की इस टिप्पणी के बाद नियुक्ति प्रक्रिया एक बार फिर से जांच के दायरे में आ गई है। हाईकोर्ट ने नगरीय विकास विभाग को निर्देश दिया है कि वह नियुक्ति से जुड़े सभी पहलुओं की पुनः समीक्षा करे और नियमों के अनुरूप स्पष्ट स्थिति के साथ नई रिपोर्ट प्रस्तुत करे।
गौरतलब है कि रेरा में चेयरमैन और सदस्यों की नियुक्ति राज्य के रियल एस्टेट सेक्टर के नियमन और पारदर्शिता के लिए बेहद महत्वपूर्ण मानी जाती है। ऐसे में नियुक्ति प्रक्रिया में पारदर्शिता और योग्यता आधारित चयन को लेकर लगातार सवाल उठते रहे हैं।
याचिकाकर्ता पक्ष का तर्क है कि यदि नियमों में किसी विशेष सेवा वर्ग को अनिवार्य रूप से प्राथमिकता दी जाती है, तो इससे योग्य उम्मीदवारों के अवसर सीमित हो सकते हैं। वहीं सरकार की ओर से नियुक्ति प्रक्रिया को नियमों के अनुसार बताया जा रहा है।
हाईकोर्ट के इस निर्देश के बाद अब नगरीय विकास विभाग को दोबारा फाइल पर विचार करना होगा और यह सुनिश्चित करना होगा कि चयन प्रक्रिया पूरी तरह नियमों और कानूनी प्रावधानों के अनुरूप हो।
इस मामले की अगली सुनवाई में विभाग की रिपोर्ट के बाद आगे की स्थिति स्पष्ट होगी। फिलहाल हाईकोर्ट की टिप्पणी ने रेरा नियुक्ति प्रक्रिया को लेकर नई बहस छेड़ दी है।