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टाइगर रिजर्व में फंड और स्टाफ की कमी पर हाईकोर्ट सख्त, NTCA से 10 साल के फंड का हिसाब मांगा

 

मध्य प्रदेश के टाइगर रिजर्व में फंड और स्टाफ की कमी को लेकर हाईकोर्ट ने सख्त रुख अपनाया है। अदालत ने नेशनल टाइगर कंजर्वेशन अथॉरिटी यानी NTCA से पिछले 10 वर्षों में टाइगर रिजर्व को उपलब्ध कराए गए फंड का पूरा हिसाब मांगा है। इसके साथ ही अदालत ने सभी टाइगर रिजर्व में कैनाइन डिस्टेंपर वायरस यानी CDV की रोकथाम के लिए आवश्यक कदम उठाने के निर्देश भी दिए हैं।

टाइगर रिजर्व में वन्यजीवों की सुरक्षा, निगरानी और संरक्षण के लिए पर्याप्त संसाधन और प्रशिक्षित स्टाफ की जरूरत होती है। ऐसे में फंड और कर्मचारियों की कमी को लेकर सामने आई स्थिति पर हाईकोर्ट ने गंभीरता दिखाई है।

10 साल के फंड का मांगा हिसाब

हाईकोर्ट ने NTCA से पिछले एक दशक में टाइगर रिजर्व के लिए जारी किए गए फंड की जानकारी पेश करने को कहा है। अदालत यह जानना चाहती है कि केंद्र की ओर से संरक्षण और प्रबंधन के लिए कितनी राशि उपलब्ध कराई गई और उसका इस्तेमाल किस तरह किया गया।

फंड की जानकारी सामने आने के बाद यह भी स्पष्ट हो सकेगा कि टाइगर रिजर्व में संसाधनों की कमी का वास्तविक कारण क्या है। अदालत ने फंड के आवंटन और उसके उपयोग से जुड़े रिकॉर्ड को महत्वपूर्ण माना है।

स्टाफ की कमी पर भी चिंता

टाइगर रिजर्व में पर्याप्त स्टाफ नहीं होने से वन्यजीवों की निगरानी और सुरक्षा व्यवस्था प्रभावित होने की आशंका रहती है। जंगल के बड़े क्षेत्र में गश्त, अवैध शिकार पर नजर, वन्यजीवों की निगरानी और आपात स्थिति में कार्रवाई के लिए पर्याप्त संख्या में कर्मचारी जरूरी हैं।

हाईकोर्ट के सामने फंड के साथ स्टाफ की कमी का मुद्दा भी उठा। अदालत ने इस स्थिति को गंभीरता से लेते हुए संबंधित अधिकारियों से आवश्यक जानकारी और कार्रवाई के संबंध में जवाब मांगा है।

सभी रिजर्व में CDV की रोकथाम के निर्देश

अदालत ने टाइगर रिजर्व में कैनाइन डिस्टेंपर वायरस यानी CDV को लेकर भी चिंता जताई है। यह बीमारी वन्यजीवों के लिए गंभीर खतरा बन सकती है। इसके मद्देनजर हाईकोर्ट ने सभी टाइगर रिजर्व में CDV की रोकथाम के लिए जरूरी कदम उठाने के निर्देश दिए हैं।

रोकथाम के तहत वन्यजीवों की निगरानी, बीमारी के संभावित मामलों की पहचान और आवश्यक स्वास्थ्य उपायों पर ध्यान देने की जरूरत होगी। अदालत ने संबंधित अधिकारियों को इस दिशा में प्रभावी व्यवस्था सुनिश्चित करने को कहा है।

संरक्षण व्यवस्था मजबूत करने पर जोर

टाइगर रिजर्व देश की महत्वपूर्ण वन्यजीव संरक्षण व्यवस्था का हिस्सा हैं। बाघों के साथ-साथ यहां कई अन्य वन्यजीव प्रजातियों का भी संरक्षण किया जाता है। ऐसे में संसाधनों की कमी वन्यजीव संरक्षण के लिए चुनौती बन सकती है।

हाईकोर्ट के निर्देश के बाद अब NTCA और संबंधित विभागों को फंड के उपयोग, स्टाफ की स्थिति और वन्यजीवों को बीमारियों से बचाने के लिए उठाए गए कदमों की जानकारी देनी होगी।

अदालत की सख्ती के बाद उम्मीद है कि टाइगर रिजर्व में संसाधनों और कर्मचारियों की स्थिति की समीक्षा होगी। साथ ही CDV जैसी बीमारियों से वन्यजीवों को सुरक्षित रखने के लिए भी प्रभावी कदम उठाए जाएंगे। अब मामले की अगली सुनवाई में NTCA की ओर से 10 वर्षों के फंड का पूरा विवरण और संरक्षण व्यवस्था से जुड़ी जानकारी पेश की जा सकती है।